आर एम कॉलेज के विश्वकर्मा के रूप में ललित बाबू का अहम योगदान : कुलसचिव
राजेन्द्र मिश्र महाविद्यालय के मीनी ऑडिटोरियम में आज महाविद्यालय के पुर्व प्राचार्य एवं अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष डा. ललित नारायण मिश्र की सेवानिवृत्ति पर आयोजित ‘विदाई सह सम्मान समारोह’ का मुख्य अतिथि बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. अशोक कुमार सिंह, प्राचार्य प्रो. डा. गुलरेज रोशन रहमान, राजेन्द्र मिश्र महाविद्यालय के पुर्व प्राचार्य प्रो. डा. रेणु सिंह एवं प्रो. डा. पी. सी. खां, विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य मेजर गौतम, राजकीय डिग्री कॉलेज सौरबाजार के प्राचार्य डा. राजीव कुमार झा, कुलसचिव स्थापना डा. विवेक कुमार, सिनेट सदस्य संजीव कुमार झा इत्यादि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर कुलसचिव डा. अशोक कुमार सिंह ने कुलपति प्रो. डा. विमलेन्दु शेखर झा द्वारा प्रेषित शुभकामना संदेश सुनाया। डा. अशोक ने डा. ललित को राजेन्द्र मिश्र महाविद्यालय का विश्वकर्मा बताकर यहां के ईंट ईंट को जोड़कर इसे एक प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में प्रतिस्थापित करने का श्रेय दिया। बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय के वित्त पदाधिकारी के रूप में मितव्ययिता के साथ विश्वविद्यालय के राजस्व से समन्वय स्थापित कर बेहतर वजट प्रस्तुत करने हेतु उनकी भुमिका को याद कर इसे विलक्षण बताया।
प्राचार्य डा. गुलरेज रौशन ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि विदाई कार्यक्रम में अक्सर मैंने लोगों को भावनाओं में टूटते देखा है परंतु इस मंच पर आज मैंने डा. ललित की जिस तरह से भावनाओं की मजबूती और कालेज के विकास के प्रति चिन्तनशील और विमर्शात्मक देखा तो महसूस कर रहा हूं कि महाविद्यालय को अभी भी इनकी सलाह और सहयोग की बहुत ही जरूरत है।
डा. रेणु सिंह ने प्राचार्य पद पर रहते हुए अपने कार्यकाल में डा. ललित द्वारा दिये गये विभिन्न योगदानों को याद किया। महाविद्यालय को नैक की मान्यता दिलाने और बीएनएमयू के किसी अंगीभूत महाविद्यालय में पहली बार बीएड की पढ़ाई शुरू करवाने में उनकी सहयोगात्मक भुमिका के लिए उन्होंने उनकी तारीफ किया।
डा. पी. सी. खां ने कहा कि डा. ललित ने व्यवहारिक रूप से पुर्व के सभी प्राचार्यों के लिए विकास कार्य में सारथी का काम किया है। उन्होंने कहा कि जब भी महाविद्यालय में कोई विकास कार्य शुरू होते थे तो डा. ललित पर कई तरह से आरोप लगते परंतु इसके लिए इन्होंने कभी भी किसी की परवाह किया और न ही किसी के लिए ईर्ष्याभाव ही रखा। यह भी निश्चित है कि उस समय यदि इनके द्वारा उक्त काम शुरू नहीं किया जाता तो महाविद्यालय का विकास भी नहीं होता। डा. राजीव कुमार झा ने कहा कि महाविद्यालय के विकास में यदि विभिन्न प्राचार्यां का योगदान है तो उनके पीछे अनवरत रूप से मजबूती से साथ खड़े रहने वाले डा. ललित के सलाह, सहयोग, समर्पण, धैर्य एवं जोश को श्रेय जाता है।
सिंडिकेट सदस्य मेजर गौतम ने कहा कि जब वह छात्र संगठन में थे तो तत्कालीन प्राचार्य डा. शिवनाथ यादव से मुद्दों पर मतभेद की स्थिति में डा. ललित ही मेरा पक्ष रखकर मामले का सुलह करवाते थे और तब से आजतक हमने महाविद्यालय के छात्रों के हित और महाविद्यालय के शैक्षणिक परिवेश को उन्नत बनाने के लिए मिलकर काम किया है।
डॉ. भवानंद मिश्र ने डॉ. ललित के कुशल नेतृत्व और सकारात्मक सोच, डॉ. भवानंद झा ने उनके सरल स्वभाव, सहृदयता एवं शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के प्रति समर्पण, डॉ. विनोद मोहन जायसवाल ने उनके कार्य में पारदर्शिता, ईमानदारी और उत्तरदायित्व बोध और डा. शैलेश्वर प्रसाद ने उन्हें मतभेद भुलाकर काम करने के सहज स्वभाव की सराहना किया। इस अवसर पर डा. आशुतोष कुमार झा, डा. ऊर्मिला अड़ोरा, डा. रामानंद रमण, डा. वीणा कुमारी मिश्रा, डा. संजय परमार, डा. आनंद कुमार मिश्रा, डा. श्वेता शरण, डा. कविता कुमारी और डा. ललित नारायण मिश्र के परिवार के सदस्यों में पुत्र सोनु कुमार, पुत्रवधु प्रियंका, दामाद अमित रंजन और सुपुत्री श्वेता इत्यादि ने भी संबोधित किया।
डा. ललित ने अपने संबोधन में इस कार्यक्रम को आयोजित करने हेतु प्राचार्य डा. गुलरेज एवं आयोजन समिति के डा. अक्षय कुमार चौधरी, डा. आलोक कुमार झा, एकॉउंट सेक्सन के आशुतोष पाण्डेय, आलोक कुमार मिश्र, नंदकिशोर झा, प्रणव प्रवीण, सुमित कुमार मिश्रा, हिफाजत, सोहराब और शिवम कुमार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने मंचासीन सभी अतिथियों को अपने सेवाकाल में सदैव सहयोग देने हेतु धन्यवाद ज्ञापित कर आज के इस कार्यक्रम मे़ं अपना बहुमूल्य समय दे कर उपस्थित रहने हेतु भी ऋणी बताया। अपने आभार ज्ञापन संभाषण में डा. ललित ने महाविद्यालय को 12 B के प्रावधान के तहत युजीसी से मान्यता प्राप्त करने, महाविद्यालय में पुस्तकालय की स्थापना करने, वर्ष 2012 में महाविद्यालय को नैक की मान्यता दिलाने, महाविद्यालय को बिहार सरकार द्वारा सेंटर ऑफ एक्सैलेंस की मान्यता दिलाने, रूशा के माध्यम से विभिन्न भवनों के लिए अनुदान प्राप्त करने में अपनी भूमिका और विभिन्न प्राचार्यों द्वारा उनपर विश्वास किये जाने के अनुभवों और परेशानियों को भी साक्षा किया। उन्होंने कहा कि राजा बाबू और अमरेन्द्र मिश्र ने शिक्षा से पिछड़े इस कोशी क्षेत्र में आन्दोलन चलाकर उच्च शिक्षा के उत्थान हेतु जिस सामाजिक काम का उत्तरदायित्व मुझे सौंपा था मैंने अपनी संपूर्ण लगन, समर्पण और धैर्य से इस महाविद्यालय में अपना योगदान देता रहा और आज मैं अपने द्वारा संपादित कार्य से काफी संतोष अनुभव कर रहा हूं। महाविद्यालय ने मुझे विभागाध्यक्ष, आइक्यूएसी काडिनेटर, रूशा के नॉडल पदाधिकारी, बर्शर, एनएसएस पदाधिकारी, प्राक परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र, बीसीए, बीबीए और बीएड के समन्वयक पद पर बिठाया तो मैंने पूरे समर्पण के साथ अपने उत्तरदायित्व को निभाने का प्रयास किया। मंच संचालन डा. अक्षय कुमार चौधरी और धन्यवाद ज्ञापन डा. आलोक कुमार झा द्वारा किया गया।
इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक डा. संजय कुमार, सुशील कुमार झा, डा. देवकांत चौधरी, पुर्व पुस्तकालयाध्यक्ष श्यामानंद झा, शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के महामंत्री प्रमोद यादव, डा. अशोक कुमार झा, रत्नेश्वर दास, सरोज झा, रामकेवल यादव, अमित कुमार, ब्रजेश शरण यादव, , सरिता कुमारी, नीतू कुमारी, वर्षा कुमारी, पूजा आनंद, निखिल, अखिलेश कुमार, आशीष, कुमार अमरज्योति, उदय तिवारी, रणधीर कुमार मिश्र, प्रमोद कुमार झा, सुधाकांत झा, हैदर, अरूण कुमार सिंह और सभी संकाय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।













