परिवर्तन का मतलब हर बार आगे बढ़ना नहीं है। कई बार यह दुर्गति की ओर बढ़ना भी हो सकता है। उच्च शिक्षा के संबंध में बिहार में किये जा रहे परिवर्तन को हम दुर्गति की ओर बढ़े कदम के रूप में भी देख सकते हैं। नीतीश कुमार की सरकार और राज्यपाल के बीच जब विवाद चल रहा था तभी उच्च शिक्षा में नीतिगत गड़बड़ी की शुरुआत हो गयी थी। उसी समय के के पाठक को शिक्षा विभाग का अपर सचिव बनाया गया। नीतीश कुमार की शह पर के के पाठक के नेतृत्व में लोकभवन और राज्य सरकार के बीच खूब खींचतान चली।
इस समय एक कार्यालय आदेश निर्गत हुआ। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय में किसी भी निर्माण कार्य के लिए अपर सचिव को अध्यक्ष तथा कुलपति को सदस्य बनाकर समिति की संरचना घोषित की गयी। ऐसे ही महाविद्यालय में निर्माण कार्य हेतु डी एम को अध्यक्ष तथा प्राचार्य को सदस्य बनाकर समिति की संरचना बनायी गयी। इन आदेशों ने कुलपति और प्राचार्य दोनों को कमजोर कर दिया। किसी शिक्षक संगठन ने इसका विरोध नहीं किया। इधर वर्षों से कुलपति कुलपतितों की भूमिका में हैं। इनकी रुचि केवल धन में है। कुलपतितों ने जब शिक्षकों का स्थानांतरण करना प्रारम्भ किया तब भी शिक्षक संगठन चुप रहे। इसके पहले बिहार में केवल ऐच्छिक स्थानांतरण होते थे। कुलपतियों की अर्थ लोलुपता स्थानांतरण का एकमात्र कारण थी। पटना साइंस कॉलेज का प्रोफेसर पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर से कम सम्मानित नहीं था। इसी तरह कई महाविद्यालयों में प्राध्यापकों की गरिमापूर्ण स्थिति ऐसी है कि वे विश्वविद्यालय के शिक्षकों से कम सम्मानित नहीं हैं । कुलपतितों की अर्थ लिप्सा ने इस संरचना और सम्मान को बहुत कुछ नष्ट कर दिया है । बिहार में ज्यादातर अंगीभूत महाविद्यालय हैं। इन महाविद्यालयों के शिक्षकों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों में कोई विभेद नहीं है।
अब सरकार महाविद्यालय शिक्षकों को दोयम दर्जे का बनाकर अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहती है। सरकारें आती -जाती रहती हैं, संस्थान समाप्त नहीं होने चाहिए। बिहार की उच्च शिक्षा की संरचना कई राज्यों से बेहतर भी है और ब्यूरोक्रेसी के नियंत्रण के बाहर भी है। इसे इसी रूप में बनाये रखते हुए दुरुस्त किया जाना चाहिए।
कविता के बारे में कहते हैं कि पहले अन्तर्वस्तु बदलती है, फिर रूप या शिल्प स्वतः बदल जाता है। यह स्थिति केवल कविता की नहीं है। मूर्खता यह है कि सरकार संरचना पहले बदलना चाहती है।
– डॉ. अंजनी श्रीवास्तव, पूर्व अध्यक्ष, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, उत्तर बिहार के फेसबुक वॉल से साभार।












