राज्यपाल का मिशन मोड निर्देश
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समर्थ के 10 मॉड्यूल तुरंत लागू करें
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उच्च शिक्षा सुधार के लिए टास्क फोर्स
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बिहार के विश्वविद्यालयों में शुरू होगा “सिस्टम अपग्रेड”, डेटा सत्यापन से लेकर प्रशासनिक सुधार तक बड़े बदलाव के संकेत
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बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था अब बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश करती दिख रही है।
राज्यपाल सचिवालय की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि अब पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलकर तकनीक आधारित, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था अपनानी होगी।
बिहार लोक भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल Syed Ata Hasnain (सेवानिवृत्त) ने सभी विश्वविद्यालयों को ‘समर्थ पोर्टल’ के मॉड्यूल्स को “मिशन मोड” में लागू करने का निर्देश दिया।
राज्यपाल ने साफ कहा कि पोर्टल के कम-से-कम 10 मॉड्यूल का तत्काल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
Portal नहीं…system बदलने की तैयारी
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यह बैठक केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म की समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने का रोडमैप भी सामने आया।
राज्यपाल ने कहा कि:
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पोर्टल पर अपलोड होने वाला हर डेटा विश्वसनीय होना चाहिए
डेटा सत्यापन की मजबूत प्रमाणन व्यवस्था विकसित की जाए
विश्वविद्यालयों में डिजिटल प्रशासनिक संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए
यानी अब “डेटा एंट्री” नहीं, बल्कि “डेटा की विश्वसनीयता” भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
तीन टास्क फोर्स… अब दूसरे राज्यों से सीखेगा बिहार
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बैठक की सबसे महत्वपूर्ण घोषणा रही —
उच्च शिक्षा सुधार के लिए तीन अलग-अलग टास्क फोर्स का गठन।
ये टीमें:
✔ दूसरे राज्यों का दौरा करेंगी
✔ वहां की विश्वविद्यालय व्यवस्था का अध्ययन करेंगी
✔ प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समझेंगी
✔ बेहतर मॉडल और “बेस्ट प्रैक्टिस” का विश्लेषण करेंगी
✔ बिहार के लिए सुधारात्मक सुझाव देंगी
यह कदम संकेत देता है कि बिहार अब “कॉपी-पेस्ट सुधार” नहीं, बल्कि अध्ययन आधारित नीति निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
जहाँ नहीं है, वहाँ खुलेगा डिग्री कॉलेज
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बैठक में उन प्रखंडों की भी समीक्षा की गई जहां अभी तक कोई डिग्री कॉलेज नहीं है। सरकार ने ऐसे क्षेत्रों में नए डिग्री कॉलेज स्थापित करने की प्रक्रिया तेज करने का संकेत दिया है।
यदि यह योजना तेजी से लागू होती है तो ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
VC से जुड़े कुलपति, दिए सुझाव
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राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया और अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक में मुख्य सचिव Pratyaya Amrit, राज्यपाल के सचिव Gopal Meena, उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं राजभवन सचिवालय के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
क्या है ‘समर्थ पोर्टल’?
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‘समर्थ पोर्टल’ उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए विकसित एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से:
छात्र प्रबंधन
परीक्षा प्रणाली
प्रशासनिक कार्य
मानव संसाधन
वित्तीय प्रक्रिया
डेटा प्रबंधन
जैसे कार्यों को डिजिटल रूप से संचालित किया जाता है।
क्यों बड़ा माना जा रहा यह कदम?
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1. विश्वविद्यालय प्रशासन में आएगी पारदर्शिता
डिजिटल मॉड्यूल लागू होने से फाइल आधारित देरी और अस्पष्टता कम होगी।
2. डेटा आधारित निर्णय लेने में मदद
विश्वसनीय डेटा उपलब्ध होने से सरकार और विश्वविद्यालय बेहतर नीति निर्णय ले सकेंगे।
3. बिहार की उच्च शिक्षा राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में आ सकती है
दूसरे राज्यों की “बेस्ट प्रैक्टिस” अपनाने से विश्वविद्यालयों की कार्यक्षमता सुधर सकती है।
4. ग्रामीण छात्रों को मिलेगा फायदा
जहां डिग्री कॉलेज नहीं हैं वहां नए कॉलेज खुलने से शिक्षा की पहुंच बढ़ेगी।
5. “डिजिटल यूनिवर्सिटी सिस्टम” की नींव
यह पहल भविष्य में पूरी तरह पेपरलेस और टेक्नोलॉजी आधारित विश्वविद्यालय प्रशासन का आधार बन सकती है।
एक नजर में बड़ी बातें
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✔ समर्थ पोर्टल के 10 मॉड्यूल तत्काल लागू होंगे
✔ डेटा सत्यापन के लिए प्रमाणन व्यवस्था बनेगी
✔ उच्च शिक्षा सुधार के लिए 3 टास्क फोर्स गठित होंगी
✔ दूसरे राज्यों की शिक्षा व्यवस्था का अध्ययन होगा
✔ बिना डिग्री कॉलेज वाले प्रखंडों पर विशेष फोकस
✔ विश्वविद्यालय प्रशासन को मिशन मोड में काम करने का निर्देश
बदलाव का साफ संकेत …
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अब बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था सिर्फ “डिग्री वितरण” तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि तकनीक, पारदर्शिता और गुणवत्ता आधारित मॉडल की ओर बढ़ने की तैयारी में है।
यदि यह मिशन जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू हुआ, तो आने वाले वर्षों में बिहार के विश्वविद्यालयों की तस्वीर और कार्यसंस्कृति दोनों बदलती नजर आ सकती हैं।
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वरिष्ठ पत्रकार श्री स्वयं प्रकाश जी के फेसबुक वॉल से साभार।













