*हमेशा प्रासंगिक रहेंगे गाँधी : कुलपति*
महात्मा गाँधी का नाम दुनिया के सर्वकालिक महान व्यक्तियों में सुमार है। वे 79 वर्षों की आयु तक सशरीर हमारे बीच रहे।लेकिन उनके विचार एवं कार्य हमेशा हमारे साथ हैं। जब तक यह दुनिया है, उनकी प्रासंगिकता बनी रहेगी।
यह बात बीएनएमयू, मधेपुरा के कुलपति प्रो. बी. एस. झा ने कही। वे शुक्रवार को प्रशासनिक परिसर अवस्थित गाँधी प्रतिमा स्थल पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन गाँधी के 78वें शहादत दिवस के अवसर पर किया गया।
कुलपति ने कहा कि मोहनदास करमचंद गाँधी का जन्म 02 अक्तूबर 1869ई. को पोरबंदर (गुजरात) में हुआ। उनकी शिक्षा-दीक्षा, प्रारंभिक शिक्षा गुजरात एवं बम्बई से हुई। इसके बाद वे बैरिस्टरी की पढ़ाई के लिए लंदन चले गए। गाँधी सन् 1893 ई .में दक्षिण अफ्रीका गए और तब तक वे मोहनदास करमचंद गाँधी ही थे।
उन्होंने बताया कि एक बार दक्षिण अफ्रीका जाने के बाद वे एक दिन रेलगाड़ी में सफर कर रहे थे। उस दौरान उन्हें अश्वेत होने के कारण श्वेत अंग्रेज अधिकारी ने रेलगाड़ी से उतारकर प्लेटफार्म पर फेंक दिया। उसी दिन से गाँधी ने पूरी दुनिया से भेदभाव को मिटाने का संकल्प ले लिया और यही मोहनदास के महात्मा बनने का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान में जो व्यक्ति दक्षिण अफ्रीका गए थे, वे मोहनदास थे। वे वहां बैरिस्टरी करने के लिए और धनार्जन के लिए गए थे। लेकिन वहाँ उन्होंने काले लोगों की जहालत भरी जिंदगी देखी और गोरों का अत्याचार देखा, तो उन्हें लगा कि इसका विरोध होना चाहिए। मोहनदास ने जिस दिन से अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई, उसी दिन से वे महात्मा बन गए।
उन्होंने कहा कि गांधी सन् 1916 ई. में दक्षिण अफ्रीका से लौटकर हिन्दुस्तान आए। यहां उन्होंने सबसे पहले सन् 1917ई. को एक आंदोलन हुआ, इसे चम्पारण सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है। महात्मा गाँधी जी के नेतृत्व में भारत में किया गया यह पहला सत्याग्रह था। इसमें बिहार के राजकुमार शुक्ल ने महती भूमिका निभाई थी।
उन्होंने बताया कि चंपारण सत्याग्रह के बाद गांधी द्वारा बहुत सारे आंदोलन हुए। इनमें सविनय अवज्ञा आन्दोलन, भारत छोड़ो आंदोलन आदि प्रमुख हैं। खासकर भारत छोड़ो आंदोलन के बाद अंग्रेज हमें आजादी देने को मजबूर हुए।
कुलसचिव प्रो. अशोक कुमार ठाकुर ने कहा कि गांधी एक कर्मयोगी थे। उनका जीवन ही हमारे लिए संदेश है। उनके जीवन-दर्शन में आधुनिक दुनिया के सभी समस्याओं का समाधान मौजूद है।
उन्होंने कहा कि गाँधी युगदृष्टा थे। उन्होंने अपनी अंतर्दृष्टि से आधुनिक सभ्यता की समस्यायों को भी समझ लिया था। उनके द्वारा बताए गए सत्य एवं अहिंसा के मार्ग पर चलकर हम वर्तमान दुनिया को महाविनाश से बचा सकते हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सभी उपस्थित लोगों ने गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि की और अंत में दो मिनट का मौन रखकर विश्वशांति के लिए प्रार्थना की गई।
कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम समन्वयक (एनएसएस) डॉ. सुधांशु शेखर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन परिसंपदा पदाधिकारी शंभू नारायण यादव ने किया।
इस अवसर पर पूर्व प्रधानाचार्य प्रो. अरविंद कुमार, महाविद्यालय निरीक्षक प्रो. राजीव कुमार मल्लिक, सीसीडी डॉ. अरविंद यादव, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सी. पी. सिंह, परीक्षा नियंत्रक डॉ. शंकर कुमार मिश्र, विकास पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार आदि उपस्थित थे।















