BNMU। शिक्षा, समाज एवं संस्कृति अन्योन्याश्रित हैं : कुलपति

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शिक्षा, समाज एवं संस्कृति तीनों एक-दूसरे से गहरे जुड़े हैं। इनमें अन्योन्याश्रय सम्बन्ध है। राष्ट्र के विकास में तीनों की महती भूमिका है।अतः हम सबों को मिलकर शिक्षा, समाज एवं संस्कृति को सही रूपों में विकसित करने की जरूरत है। यह बात बीएनएमयू, मधेपुरा के कुलपति डाॅ. अवध किशोर राय ने कही। वे बुधवार को बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के फेसबुक पेज से ‘शिक्षा, समाज एवं संस्कृति’ विषय पर लाइव व्याख्यान दे रहे थे। व्याख्यान के पूर्व कुलपति का प्रति कुलपति डॉ. फारूक अली, महाविद्यालय निरीक्षक (विज्ञान) डॉ. उदयकृष्ण, पीआरओ डाॅ. सुधांशु शेखर एवं कुलपति के निजी सहायक शंभू नारायण यादव ने पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।
कुलपति ने कहा कि आम तौर पर समाज को व्यक्तियों का समूह माना जाता है। लेकिन व्यक्तियों के सभी समूहों को समाज नहीं कहते हैं। वह समूह जो किसी खास उद्देश्य की पूर्ति के लिए बने हों और व्यक्तियों की आपसी सहमति के आधार पर किसी स्थान विशेष में स्थायी रूप से रहते हों, समाज कहलाता है।समाज व्यक्ति के लिए एक अनिवार्यता है। इसलिए मनुष्य को सामाजिक प्राणी कहते हैं।
कुलपति ने कहा कि आज कोरोना संकट ने हमारे समाज पर व्यापक असर डाला है। इससे जानमाल की काफी क्षति हुई है। साथ ही सामाजिक तानेबाने पर ही बुरा असर पड़ रहा है। कोरोना से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने का निदेश है। हमें एक-दूसरे से दो गज की दूरी रखनी है। लेकिन हमें सोशल डिस्टेंसिंग का सही अर्थ भौतिक दूरी है। हमें भावनात्मक दूरी नहीं रखनी है।
कुलपति ने ईश्वर से कामना की कि सिर्फ मधेपुरा एवं बिहार ही नहीं, बल्कि पूरा देश एवं पूरा संसार कोरोना मुक्त हो। पूरा संसार सुखी हो। सब सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें। किसी को भी दुःख का भागी नहीं बनना पड़े।
कुलपति ने कहा कि प्रत्येक समाज की उन्नति में शिक्षा  की महती भूमिका है। शिक्षा  ही संस्कृति का भी प्राणतत्व है। शिक्षा हमें गुरू (विशेषज्ञ) द्वारा शिक्षण से, ग्रंथों के अध्ययन से और आधुनिक काल में संचार माध्यमों से प्राप्त होती है। अगर व्यक्ति शिक्षित नहीं होंगे, तो उनका न तो चारित्रिक विकास हो पायेगा और न वे किसी कौशल या क्षमता से सम्पन्न हो सकेंगे। ऐसे लोग समाज को उत्कर्ष की ओर नहीं ले जा सकते। संभव है शिक्षा के बिना अज्ञान के अंधकार में भटकता व्यक्ति न केवल समाज के लिए, बल्कि स्वयं के लिए भी खतरा बन जाय।
कुलपति ने कहा कि समाज शिक्षा द्वारा ही विकास के पथ पर अग्रसर होता है। शिक्षा से ही व्यक्ति हुनरमंद बनता है। शिक्षा व्यक्ति का कौशल विकास करती है। गाँधी जी का मानना था कि शिक्षा सिर्फ अक्षर ज्ञान नहीं है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति के मस्तिष्क के साथ-साथ उसके शरीर एवं हृदय का भी विकास होना चाहिए।
कुलपति ने कहा कि नैतिक शिक्षा द्वारा नैतिक चेतना जगाकर व्यक्ति को नैतिक सद्गुणों और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाने हेतु प्रेरित किया जा सकता है। इसलिए नैतिक शिक्षा को सभी प्रकार के पाठ्यक्रमों का एक अनिवार्य हिस्सा बनाने की आवश्यकता आजकल सभी कोई महसूस कर रहे हैं। मूल्यों के क्षरण की इस घड़ी में नैतिक शिक्षा एक अचूक दवा का काम कर सकती है।
कुलपति ने कहा कि  समाज-परिवर्तन में शिक्षा की महती भूमिका है। अतः सबों को समान एवं गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। राष्ट्रपति का बेटा या भंगी की संतान सबको शिक्षा एक समान इस नारे को धरातल पर उतारने की जरूरत है।
कुलपति ने कहा कि शिक्षा और संस्कृति एक दूसरे से जुड़ी है। मनुष्य अपनी बुद्धि का प्रयोग कर निरन्तर अपनी स्थिति को सुधारता रहता है, उन्नत करता रहता है, अपने को परिष्कृत करता रहता है। इस प्रयत्न के फलस्वरूप उसकी जीवन-पद्धति, उसके रीति-रिवाज, रहन-सहन, आचार-विचार आदि में परिष्कार होता रहता है। व्यक्तियों के किसी समूह विशेष की इसी परिष्कृत जीवन-पद्धति को संस्कृति कहते हैं।
कुलपति ने कहा कि संस्कृति का किसी राष्ट्र या राज्य के साथ एक तीव्र भावनात्मक सम्बन्ध हुआ करता है। यह किसी राष्ट्र की विशेष पहचान होती है। यदि किसी राष्ट्र की संस्कृति को कोई आघात पहुँचता है, तो उसके विरूद्ध तीव्र प्रतिक्रिया होती है।
कुलपति ने कहा कि भारत की संस्कृति सनातन है। यह सामासिक संस्कृति है। इसमें अनेक संस्कृतियाँ धुलमिल कर एकरूप हो गयी हैं; इसने अनेक संस्कृतियों को इस तरह आत्मसात् कर लिया है कि हमें अनेकता के बीच एकता का स्पष्ट बोध होता है। भारतीय संस्कृति में आचार्य देवो भव, मातृ देवो भव, पितृ देवो भव एवं अतिथि देवो भव का आदर्श प्रस्तुत किया गया है।
कुलपति ने कहा कि जिस देश की जैसी संस्कृति होती है, उस देश की शिक्षा का स्वरूप भी प्रायः उसी के अनुरूप होता है। जैसी शिक्षा होती है, वैसा ही समाज बनता है। शिक्षा हमारे सामाजिक सम्बन्धों को मजबूती प्रदान करती है। अतः हमें शिक्षा का सदुपयोग अपने समाज एवं संस्कृति के उन्नयन में करना चाहिए।
मालूम हो कि फेसबुक पेज पर कुलपति का यह व्याख्यान लोगों को काफी पसंद आया। बुधवार को अपराह्न तीन बजे तक लगभग तीन हजार लोगों ने देखा, पाँच सौ लोगों ने पसंद किया और इस पर 150 कमेंट्स आ चुका था।
प्रति कुलपति का व्याख्यान 21 मई को
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बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के फेसबुक पेज पर 21 मई (गुरूवार) को पूर्वाह्न 10.00 बजे प्रति कुलपति प्रो. (डाॅ.) फारूक अली का लाइव व्याख्यान होगा। वे प्रकृति की ओर लौटें विषय पर अपनी बात रखें। इस पेज का लिंक https://m.facebook.com/ bnmusamvad है।
कार्यक्रम के आयोजक डाॅ. सुधांशु शेखर ने बताया कि डाॅ. अली ने 1 जून, 2017 को बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के प्रति कुलपति का पदभार ग्रहण किया था। इन्होंने अपने कार्यकाल में कुलपति के साथ मिलकर यहाँ बदलाव एवं विकास के कई कीर्तिमान गढ़े हैं। इसके पूर्व वे टी. एन. बी. काॅलेज, भागलपुर में जंतु विज्ञान विभाग के अध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे।
कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव प्रसाद ने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों से अपील की है कि वे प्रति कुलपति का व्याख्यान सुनें और लाभान्वित हों।
जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने बताया कि आगे शिक्षा संकायाध्यक्ष डाॅ. राकेश कुमार सिंह कोरोना के बाद अध्यापक शिक्षा और बीएनमुस्टा के महासचिव डाॅ. नरेश कुमार पर्यावरणीय नैतिकता विषय पर व्याख्यान देंगे। इन दोनों के व्याख्यान की तिथि एवं समय का निर्धारण शीघ्र ही किया जाएगा। अन्य शिक्षकों से भी व्याख्यान के लिए समय माँगा गया है।

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