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BNMU ओपीएस लागू करने की मांग

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*ओपीएस लागू करने की मांग*

बीएनएमयू के नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों ने नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस), मधेपुरा इकाई के बैनर तले शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर को ज्ञापन देकर बिहार में भी एक सितंबर 2005 के प्रभाव से लागू नई अंशदायी पेंशन योजना (एनपीएस) को निरस्त कर और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को पुनर्स्थापित करने की मांग की है।

मंत्री ने कहा कि एनपीएस पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। भले ही कुछ कुछ खास दल वाले इस पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। लेकिन देश के विभिन्न राज्यों में एनपीएस को समाप्त कर ओपीएस लागू करने की बात हो रही है। बिहार में सामाजिक न्याय की वर्तमान सरकार निश्चित रूप से इस पर ध्यान देगी।

मालूम हो कि बिहार सरकार के द्वारा प्रति माह कर्मियों के पेंशन के नाम पर चौदह प्रतिशत राशि अपने हिस्से का और दस प्रतिशत राशि कर्मियों के वेतन से काटकर एजेंसी के पास जमा किया जाता है। स्पष्ट है कि एनपीएस से सरकार और कर्मियों दोनों को नुकसान हो रहा है। राज्य सरकार को भी प्रतिमान राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है और कर्मियों को भी लाभ मिलने की कोई गारंटी नहीं है। इसके विपरित पुरानी पेंशन योजना से आच्छादित कर्मियों द्वारा प्रतिमान अपने वेतन से जीपीएफ में राशि जमा किया जाता था, जिससे बिहार सरकार के राजस्व में वृद्धि होती थी।

असिस्टेंट प्रोफेसरों का कहना है कि नई पेंशन योजना के लागू होने से राज्यकर्मियों को विभिन्न प्रकार को कठिनाई हो रही है एवं सेवानिवृत अथवा उसके पूर्व मृत्यु के उपरांत मिलने वाली पेंशन की राशि बहुत ही कम होती है। यह राशि वृद्धावस्था में आवश्यक जीवन निर्वाह के लिए पर्याप्त नहीं है। इससे वृद्धावस्था में सामाजिक प्रतिष्ठा एवं सुरक्षा को लेकर आशंकित है।

ज्ञातव्य हो कि नई पेंशन योजना में शेयर बाजार पर आधारित पेंशन मिलेगा, जिससे नुकसान की संभावना बनी रहती है। उदाहरण के रूप में कोविड संक्रमण के दौरान सभी एनपीएस कर्मियों के फण्ड में जमा राशि शेयर बाजार गिरने के कारण कम हुई है। साथ ही सेवानिवृति के उपरांत महंगाई भत्ता एवं वेतन पुनरीक्षण जैसी कोई सुविधा नहीं है। नई पेंशन प्रणाली में सेवाकाल के दौरान राशि निकालने के लिए जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जो कर्मियों के लिए परेशानी का सबब है।

असिस्टेंट प्रोफेसरों का कहना है कि एनपीएस संबंधी भारत सरकार का उक्त आदेश राज्यों के लिए बाध्यकारी नहीं है। पश्चिम बंगाल में अभी भी पुरानी पेंशन योजना लागू है। छत्तीसगढ़, राजस्थान एवं झारखण्ड सरकार द्वारा पुरानी पेंशन योजना पुनः लागू कर दिया गया है। अन्य सरकारें भी इस दिशा में प्रयासरत हैं। अतः बिहार में भी एनपीएस को समाप्त कर ओपीएस लागू करने की जरूरत है।

इस अवसर पर महेंद्र मंडल (मैथिली), डॉ. सुधांशु शेखर (दर्शनशास्त्र), डॉ. सज्जाद अख्तर (उर्दू), डॉ. शिवा शर्मा (गणित), डॉ. चंद्रशेखर आजाद (राजनीति विज्ञान), डॉ. रवीन्द्र कुमार (वाणिज्य), डॉ. अमरेंद्र कुमार (इतिहास), सुशांत कुमार सिंह (अर्थशास्त्र), प्रतीक कुमार (हिंदी), डॉ. विजय पटेल (रसायनशास्त्र) आदि उपस्थित थे।

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