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BNMU केपी कॉलेज में शिक्षा मंत्री का स्वागत

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*शिक्षा मंत्री का स्वागत*

बीएनएमयू, मधेपुरा की अंगीभूत इकाई कमलेश्वरी प्रसाद महाविद्यालय, मुरलीगंज-मधेपुरा में शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर का स्वागत किया गया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य डॉ. जवाहर पासवान ने कहा कि लंबे समय बाद मधेपुरा की धरती से जुड़े नेता को शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी मिली है। पहली बार मधेपुरा के नेता को शिक्षा मंत्री का पद मिला है। इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव विशेष रूप से साधुवाद के पात्र हैं।

उन्होंने कहा कि प्रोफेसर चंद्रशेखर सामाजिक सरोकारों से जुड़े एक शिक्षाविद् हैं और वे हमेशा बिहार की शिक्षा के उन्नयन हेतु प्रयासरत रहे हैं। उनसे पूरे बिहार और विशेषकर केपी महाविद्यालय को काफी उम्मीदें हैं।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि वे बिहार में शिक्षा के समग्र विकास हेतु प्रतिबद्ध हैं। महाविद्यालय की ओर से जो भी प्रस्ताव आएगा, उस पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाएगा।

इसके पूर्व महाविद्यालय परिसर में पहुंचते ही एनसीसी कैडेट्स ने शिक्षा मंत्री की अगुवानी की। मंत्री ने महाविद्यालय के संस्थापक कमलेश्वरी प्रसाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। प्रधानाचार्य डॉ. जवाहर पासवान ने अपने कक्ष में शिक्षा मंत्री का अंगवस्त्रम् एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। नव नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर के प्रतिनिधि मंडल ने भी उनसे मिलकर अपनी मांगों से अवगत कराया।

इस अवसर पर उप कुलसचिव स्थापना डॉ. सुधांशु शेखर, एनएसएस पदाधिकारी डॉ. अमरेंद्र कुमार, एनएमओपीएस के अध्यक्ष सुशांत कुमार सिंह, सहायक कुलसचिव डॉ. सज्जाद अख्तर, डॉ. शिवा शर्मा, डॉ. चंद्रशेखर आजाद, डॉ. रवीन्द्र कुमार, महेंद्र मंडल, प्रतीक कुमार, डॉ. विजय पटेल, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. राघवेंद्र कुमार, डॉ. अमित रंजन, शालू पंसारी, रितु रत्नम, डॉ. एम एस रहमान बाबुल, डॉ. कमल पंकज, डॉ. नजराना, नीरज कुमार निराला, देवाशीष देव, महेश राम, राजेश आदि उपस्थित थे।

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विषय : माननीय विधान पार्षद, डॉ० संजीव कुमार सिंह एवं अन्य माननीय विधान पार्षदगण के संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्राप्त पत्र, जो बिहार में स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं राज्य की उच्च शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित है, पर यथोचित कार्रवाई करने के संबंध में।

विषय : बिहार के राज्य विश्वविद्यालयों के अंगीभूत (संघटक) स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उसके विश्वविद्यालयीय स्वायत्तता, शैक्षणिक मानकों एवं शिक्षकों की सेवा-शर्तों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में प्रतिवेदन।

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