राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जयंती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कल शाम छह बजे दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में वर्ष 2026 का राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त सम्मान इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव, भारतीय विरासत विश्वविद्यालय, नोएडा के कुलपति और प्रख्यात साहित्यकार डॉ. सच्चिदानंद जोशी को दिया जाएगा। इससे पूर्व यह सम्मान भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री और साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, पद्मश्री डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी, पद्मश्री डॉ. अवध किशोर जड़िया, मैत्रेयी पुष्पा, प्रो. सुरेंद्र दुबे, गीतों के राजकुमार डॉ. विष्णु सक्सेना, प्रो. नंदकिशोर पाण्डेय, प्रो. कन्हैया सिंह और प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त को दिया जा चुका है।
इस अवसर पर आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में प्रख्यात कवयित्री अनामिका जैन ‘अम्बर’, अभिराज पाठक और अर्जुन सिंह ‘चांद’ अपनी कविताओं से श्रोताओं को रससिक्त करेंगे।यह जानकारी राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के पौत्र डॉ. वैभव गुप्त द्वारा दी गई। प्रेस वार्ता में बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता कला संकाय एवं अध्यक्ष हिंदी विभाग प्रो. पुनीत बिसारिया ने बताया कि हिंदी विभाग में तीन अगस्त को सुबह ग्यारह बजे समारोह का उद्घाटन कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय की अध्यक्षता तथा डॉ. सच्चिदानंद जोशी के मुख्य आतिथ्य एवं दिल्ली से पधारे अंकित सिद्धांत के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न होगा। राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय “भारतीय ज्ञान परंपरा में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का प्रदेय” निर्धारित किया गया है। इसमें देश विदेश के दो सौ से अधिक शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी, साहित्यकार एवं स्वतंत्र शोधकर्ता ऑनलाइन तथा ऑफलाइन माध्यम से भाग लेंगे। इसी दिन विश्वविद्यालय एवं सभी संबद्ध महाविद्यालयो के विद्यार्थियों के लिए निबंध लेखन एवं भाषण प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी। प्रथम तकनीकी सत्र का विषय “भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहक के रूप में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त” तथा द्वितीय तकनीकी सत्र का विषय “गुप्त जी का काव्य : संस्कृति, दर्शन एवं राष्ट्रीय चेतना” रहेगा।
4 अगस्त को सुबह ग्यारह बजे से तृतीय तकनीकी सत्र में “मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य : भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयाम” विषय पर चर्चा होगी। साथ ही काव्य लेखन एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी। सभी प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को क्रमशः ₹5000, ₹3000 एवं ₹1000 के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। विजेता प्रतिभागियों के लेख स्मारिका में प्रकाशित किए जाएंगे, जिसका विमोचन 13 अगस्त, 2026 को 31वें दीक्षांत समारोह में माननीय कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के करकमलों से किया जाएगा।
चतुर्थ तकनीकी सत्र में शोध-पत्र वाचन एवं अकादमिक विमर्श होगा, जबकि समापन सत्र में संगोष्ठी प्रतिवेदन, प्रतिभागियों के विचार, प्रमाण-पत्र वितरण तथा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक प्रो. पुनीत बिसारिया हैं। सहसंयोजकों में डॉ. अचला पाण्डेय, डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी और डॉ. नवीन चंद पटेल शामिल हैं।
आयोजन सचिव डॉ. बिपिन प्रसाद तथा आयोजन सह-सचिव डॉ. सुनीता वर्मा, डॉ. प्रेमलता श्रीवास्तव, डॉ. सुधा दीक्षित एवं डॉ. द्युति मालिनी हैं।
संगोष्ठी के संयोजक प्रो. पुनीत विसारिया ने बताया कि पंजीकरण कार्यक्रम स्थल पर ही किया जाएगा। पंजीकरण शुल्क शिक्षकों के लिए ₹1000, शोधार्थियों के लिए ₹500 तथा विद्यार्थियों के लिए ₹300 निर्धारित किया गया है। संगोष्ठी से भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शोध की नई दिशाओं को प्रोत्साहन मिलने तथा राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के साहित्य के नवीन मूल्यांकन का मार्ग प्रशस्त होने की अपेक्षा व्यक्त की गई है। संगोष्ठी में प्राप्त शोध पत्रों को शोध जर्नल में प्रकाशित करने की भी योजना है। पत्रकार वार्ता में अर्जुन सिंह चांद, दिल्ली के सत्यभान सिंह और पत्रकार सुमित मिश्रा, ओमेन्द्र कुमार, जलज राय, डॉ. नवीन चंद पटेल समेत विभिन्न प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
















