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बिहार सरकार के प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के विरूद्ध एकजूट होकर एक योजनाबद्ध एवं प्रभावी लड़ाई लड़ने की एक राज्यस्तरीय रूपरेखा

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विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा बिहार

केन्द्रीय कार्यालय डा० ए०के० सेन भवन, लोहियानगर, कंकड़बाग, पटना-800020
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बिहार सरकार के प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 द्वारा विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों की स्वायतता पर प्रहार तथा विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों का अकादमिक, प्रशासनिक एवं वित्तीय नियंत्रण सरकार द्वारा अपने हाथों में लिए जाने के प्रयास के विरूद्ध बिहार के सभी विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों को एकजूट होकर एक योजनाबद्ध एवं प्रभावी लड़ाई लड़ने की एक राज्यस्तरीय रूपरेखा तय की गई है।

सन् 1949 में भारत के दुसरे राष्ट्रपति एवं नामचीन शिक्षाविद डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की अध्यक्षता में तत्कालीन भारत सरकार द्वारा गठित यूनिवर्सिटी एजूकेशन कमीशन के रिपोर्ट में आजाद भारत में विश्वविद्यालयों की स्थापना एवं मकसद का विवरण दिया गया है। इसमें भारत के हायर एजूकेशन को पूर्ण स्वायतता देने की वकालत की गई है। इसी रिपोर्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के क्रम में बाद में यूनिवर्सिटी ग्रांटस् कमीशन की स्थापना की गई। इस रिपोर्ट के दुसरे अध्याय में लिखा गया है कि उच्च शिक्षा पर राज्य का पूर्ण नियंत्रण तानाशाही शासन व्यवस्थाओं को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण कारण रहा है। उच्च शिक्षा प्रदान करना राज्य का दायित्व है। परंतु राज्य की सहायता को शैक्षणिक नीतियों और कार्यप्रणालियों पर राज्य के नियंत्रण का कारण नहीं बनाया जाना चाहिए। बौद्धिक प्रगति के लिए स्वतंत्र विचार और मुक्त अनुसंधान की भावना को स्थापित करना आवश्यक है। उच्च शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षकों को विवादास्पद विषयों पर भी अपने विचार व्यक्त करने की उतनी ही स्वतंत्रता होनी चाहिए जितनी किसी स्वतंत्र देश में अन्य नागरिकों को। उस रिपोर्ट में आगे यह कहा गया है कि ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों को जो सम्मान प्राप्त है उसका मुख्य कारण यह है कि वे संवैधानिक रूप से या व्यवहार में भी सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त हैं। हमारे विश्वविद्यालयों को भी सरकार के नियंत्रण से मुक्त किया जाना चाहिए।

उपरोक्त तर्क के आधार पर राधाकृष्णन आयोग द्वारा विश्वविद्यालय की स्वायतता की वकालत की गई थी जो आज तक कमोबेश हमें प्राप्त है, हालाकि सरकारों द्वारा बीच-बीच में इसे पुर्णतः या आंशिक रूप से छीनने के कुतसित प्रयास होते रहे है। प्रस्तावित अधिनियम के आने से शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की सेवा शर्ते एवं हितों पर भी प्रभार होगा, क्योकि पूर्व से भी शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के वेतन, पेंशन एवं अन्य हितों की है। नए अधिनियम के बाद तो सरकार बिलकुल बेलगाम हो जाएगी। सरकार के वेतन सत्यापन कोषांग द्वारा न्यायालय के आदेशों के बावजूद शिक्षकेत्तर कर्मियों को परेशान किया जाता रहा है और परिनियम समिति द्वारा निर्धारित वेतनमान को रद्द कर अपने स्तर से मनगढ़ंत वेतनमान निर्धारित कर वेतन कटौती किया जाता रहा है।

इस अधिनियम के आने से बिहार के विद्याथियों के अकादमिक भविष्य पर भी ढेर सारे अनिश्चताओ का बादल गहराएगा जो NEP-2020 के परिकल्पनाओं के विरूद्ध होगा।

बिहार के वर्तमान परिस्थितियों के आलोक में सम्पूर्ण बिहार में प्रस्तावित विश्वविद्यालय अधिनियम के विरोध में जारी आन्दोलन को और प्रभावी बनाने, इसे धार देने तथा इसकी निरंतरता को बनाए रखने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा बिहार के संयुक्त तत्वाधान में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम तय किए गए है जिसका विवरण संलग्न है।

चारों संगठनों (फुटाब, फुस्टाब, बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यलाय कर्मचारी महासंघ एवं बिहार राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ) के नेतृत्व के सहमति से दिनांक 25/07/2026 को 12:30 बजे अपराह्न से शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ, डॉ ए. के. सेन भवन लोहिया नगर, कंकड़बाग, पटना-20 में प्रदेश भर के सभी विश्वविद्यालयों के अध्यक्ष / सचिव के साथ बैठक हुई। इस बैठक में चारों संगठनों के राज्य नेतृत्व के अलावा विधान पार्षद डॉ मदन मोहन झा, प्रो बिरेन्द्र नारायण यादव भी उपस्थित थे। प्रेदश भर से आए संगठनों के पदाधिकारियों ने बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 एवं पटना विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 को निरस्त कर प्रस्तावित विधेयक लाने के विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन करने की सलाह दी। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय हुआ कि इस प्रस्तावित विधेयक के खिलाफ एक संयुक्त संघर्ष मोर्चा गठित किया जाए जिसमें चारों संघों के पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि को शामिल किया जाए। साथ ही यह भी सहमति बनी कि महाविद्यालय के प्रधानाचायों/ स्नातकोत्तर विभागाध्यक्षों/ विश्वविद्यालय के पदाधिकारी समेत छात्र एवं अन्य बुद्धिजीवी से भी सहयोग हेतु अनुरोध किया जाए। इस आंदोलन को चलाने हेतु संयोजक द्वय प्रो. डॉ. संजय कुमार सिंह, विधान पार्षद एवं महासचिव, फुटाब तथा श्री गंगा प्रसाद झा, मुख्य संरक्षक, बिहार राज्य विश्वविश्वविद्यलाय महाविद्यलाय कर्मचारी महासंघ को संघर्षात्मक कार्यक्रम की रूप रेखा तय करने हेतु अधिकृत किया गया तथा इसके लिए एक संयुक्त संघर्ष मोर्चा बनाया गया जो निम्नवत है-
संघर्ष मोर्चा

प्रो. डॉ. संजय कुमार सिंह, विधान पार्षद एवं महासचिव, फुटाब

डॉ. मदन मोहन झा, विधान पार्षद

डॉ. विरेन्द्र नारायण यादव, विधान पार्षद एवं उपाध्यक्ष, फुस्टाब

डॉ. संजीव कुमार सिंह, विधान पार्षद

डॉ. नवल किशोर यादव, विधान पार्षद

डॉ. अशोक कुमार सिंह, उपाध्यक्ष, एआई फुकटो

डॉ. शिवसागर प्रसाद

प्रो. डॉ. शैलेश कुमार सिंह

प्रो. डॉ. संतोष कुमार

श्री गंगा प्रसाद झा, मुख्य संरक्षक, बिहार राज्य विश्वविश्वविद्यलाय एवं महाविद्यलाय कर्मचारी महासंघ

श्री राधवेन्द्र कुमार सिंह, महासचिव, विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ

श्री ब्रज किशोर सिंह, संरक्षक, बिहार राज्य विश्वविश्वविद्यलाय एवं महाविद्यलाय कर्मचारी महासंघ

श्री बेंकटेश कुमार, अध्यक्ष, बिहार राज्य विश्वविश्वविद्यलाय एवं महाविद्यलाय कर्मचारी महासंघ

श्री रोहित कुमार, महामंत्री, बिहार राज्य विश्वविश्वविद्यलाय एवं महाविद्यलाय कर्मचारी महासंघ

संयुक्त संघर्ष मोर्चा द्वारा निम्नांकित चरणबद्ध आंदोलन की रूप-रेखा तय की गई है।

1. दिनांक 5 अगस्त से 8 अगस्त 2026 तक सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों/स्नातकोतर विभागों के शिक्षक एवं कर्मचारी संयुक्त रूप से विरोध स्वरूप काला बिल्ला लगा अपने कार्यों का निष्पादन करेंगें।

2. 10 अगस्त 2026 को सभी शिक्षक/शिक्षकेत्तर कर्मी Mass CL ले कर विश्वविद्यालय मुख्यालय पर रोषपूर्ण प्रर्दशन करेंगे एवं कुलपति को ज्ञापन सौंपेंगे।

3. 11 अगस्त 2026 से 25 अगस्त 2026 तक विश्वविद्यालय/स्नातकोतर विभाग एवं महाविद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी अपने कार्य स्थल पर प्रतेक कार्य दिवस को अपराह्न 1:30 बजे से 2 बजे के बीच 30 मिनट तक नारे बाजी करेंगे और इस संर्दभ में मिडिया को सुचित करेंगे। तदोपरांत अपने कार्य स्थल पर अपना कार्य संपन्न करेंगे। 4. 5 सितम्बर 2026 को शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रस्तावित विधेयक पर विद्यार्थियों/अभिभावकों के साथ संवाद करेंगे।

बिहार के सभी विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों के शिक्षक संघों एवं शिक्षकेत्तर कर्मी संघों से अनुरोध है कि वे इस कार्ययोजना का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे।

आवश्यक निर्देश:-

1. चारों संगठनों के पदाधिकारी अपने स्तर पर समन्वय बनाकर संघर्षात्मक कार्यक्रमों को सफल बनाएंगे।

2. सभी प्रधानाचार्य / स्नातकोतर विभागाध्यक्षों से इस आंदोलन में सहभागिता का अनुरोध करेंगे।

3. प्रतिदिन के संघर्षात्मक कार्यक्रमों को Electronic Media एवं Print Media को आवश्यक रूप से प्रकाशनार्थ/प्रसारणार्थ सूचित करेंगे।

 

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बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 में प्रस्तावित संशोधन के विरुद्ध विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं शिक्षक हितों की रक्षा के लिए आज बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (FUTAB) के तत्वावधान में बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक संघ एवं कर्मचारी संगठनों की संयुक्त बैठक 

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विषय : माननीय विधान पार्षद, डॉ० संजीव कुमार सिंह एवं अन्य माननीय विधान पार्षदगण के संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्राप्त पत्र, जो बिहार में स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं राज्य की उच्च शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित है, पर यथोचित कार्रवाई करने के संबंध में।