नास्ति मातृसमा छाया…
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“नास्ति मातृसमा छाया नास्ति मातृसमा गतिः। नास्ति मातृसमं त्राणं नास्ति मातृसमा प्रपा॥”
-‘स्कंद पुराण’, ‘नागर खंड’
(“माता के समान कोई छाया नहीं, कोई आश्रय नहीं, कोई सुरक्षा नहीं। माता के समान इस विश्व में कोई जीवनदायिनी नहीं॥”)
अत्यंत ही हृदयविदारक वेदना के साथ लिखना पड़ रहा है कि 04 जून, 2026 को देर शाम हमारी माताजी श्रीमती रंजन सिंह अपने पार्थिव अनंत-यात्रा पर चली गईं। कल 05 जून, 2026 को अपराह्न अगैबीनाथ धाम सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा के पवित्र तट पर उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
इस बीच असह्य दुख की इस घड़ी में आप सबों के द्वारा लगातार सोशल मीडिया तथा मोबाइल एवं वाट्सएप पर सांत्वना संदेश मिला है, इसके लिए आभारी बना रहूंगा।
मैं आप सबों को बताना चाहता हूं कि ज्येष्ठ सुपुत्र के रूप में मैं विधिवत अनुष्ठान में लगा हूँ और श्राद्धकर्म संपन्न होने तक मेरे द्वारा सोशल मीडिया एवं मोबाइल फोन का उपयोग नहीं के बराबर किया जाएगा। यदि मैं किन्हीं का फोन रिसीव नहीं करूं या संदेश का उत्तर नहीं दे सकूं, तो कृपया इसे अन्यथा नहीं लेंगे।
-सुधांशु शेखर, ज्येष्ठ सुपुत्र, श्रीमती रंजन सिंह एवं श्री लाल बिहारी सिंह, ग्राम-बोधनगर (टिटही), थाना-शंभूगंज, जिला-बांका (बिहार)












