डॉ. संजीव कुमार सिंह, माननीय सदस्य, बिहार विधान परिषद् ने अप्रैल 2020 में ही “शिक्षा विभाग के अधीन स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय अंतर्गत वेतनानुदानित एवं नियमित वेतनभोगी सभी कोटि के शिक्षकों के ससमय वेतन भुगतान के संबंध में” तत्कालीन वित्त मंत्री श्री सुशील मोदी जी को पत्र लिखा था, जिसकी मुख्य बातें इस प्रकार है-
विषयांकित संदर्भ में विदित है कि शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के साथ-साथ महाविद्यालयों के शिक्षकों की वेतन संबंधी क्रमशः निम्न कोटियों हैं-
(ⅰ) प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों के नियमित शिक्षक
(ii) प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों के नियोजित शिक्षक
(a) स्थानीय निकाय के 66,000 शिक्षक अनुदानित
(b) समग्र शिक्षा अभियान अंतर्गत बिहार शिक्षा परियोजना द्वारा देग वेतनादि
(iii) गैर-सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक – अनुदानित
(iv) राजकीय/ राजकीयकृत/परियोजना/कन्या उच्च विद्यालयों के नियमित शिक्षक
(V) अल्पसंख्यक विद्यालय अनुदानित
(VI) इन्टरमीडिएट (+2 शिक्षा) एवं व्यावसायिक शिक्षा के नियमित शिक्षक
(VII) क्ति अनुदानित माध्यमिक एवं इन्टरमीडिएट स्तर के शिक्षक अनुदानित
(Vi) गैर-सरकारी मदरसा अनुदानित
(1x) गैर-सरकारी संस्कृत अनुदानित
(X) स्थानीय निकाय के तहत नियोजित माध्यमिक शिक्षक / पुस्तकालयाध्यास/ उच्चतर माध्यमिक शिक्षक-अनुदानित
(XI) समग्र शिक्षा अभियान के तहत उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक-अनुदानित
(XII) सिमुलतल्ला आवासीय विद्यालय के शिक्षक – अनुदानित
(XIII) वित्त अनुदानित संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों के शिक्षक – अनुदानित
(XIV) राज्य के परम्परागत विश्वविद्यालयों के शिक्षक – अनुदानित
महोदय, उपरोक्त अंकित क्रमांक (ⅰ), (iv) एवं (vi) के शिक्षक निदेशालय द्वारा आवंटन निर्गत किये जाने के पश्चात् नियमित रूप से वेतनादि भुगतान प्राप्त करते हैं जिसमें स्वीकृत्यादेश संबंधी प्रावधान नहीं है।
पुनः शेष क्रमांक ii (a), (iii), (v), (vii), (viii), (x), (x), 1), (11), (11) एवं (XIV) अनुदानित कोटि से आते हैं। वेतन भुगतान की प्रक्रिया में यहाँ पर स्वीकृत्यादेश का प्रावधान है। स्वीकृत्यादेश संबंधी उन प्रस्तावों को संबंधित निदेशालयों के प्रशाखा द्वारा तैयारी के क्रम में विभिन्न प्रक्रिया पूरी किये जाने के उपरान्त निर्गत होने में काफी विलंब होता है, जिसके कारण इस कोटि के शिक्षकों को कई-कई माह तक वेतन नहीं मिल पाता है। खासकर (1) एवं (XIII) पर अंकित वित्त अनुदानित माध्यमिक एवं इन्टरमीडिएट के साथ-साथ डिग्री स्तर के शिक्षण संस्थानों के शिक्षक पाँच तथा आठ वर्षों से बिना वेतन के ही कार्य करने को विवश हैं।
चूंकि उक्त अनुदानित कोटि के शिक्षकों का वेतन “स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय अंतर्गत” प्रावधानित है इसीलिए शिक्षक हित में वित्त विभाग, बिहार सरकार के ज्ञपांक-2561, दिनांक- 17 अप्रैल, 1998 के आलोक में पूर्व के वितीय वर्ष के आधार पर कुल वास्तविक व्यय का 33% आवंटन सीधे संबंधित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDD) को उपलब्ध कराया जाय ताकि सभी शिक्षकों का वेतनानुदान ससमय विमुक्त किया जा सके। पुनः यदि अप्रैल माह में ही संबंधित स्वीकृति राज्य कैबिनेट से ले ली जाती है तो वार्ष भर निर्बाध रूप से प्रतिमाह राशि का व्यय किया जाना संभव होगा और ऐसे कोई भी शिक्षक वेतन से वंचित नहीं रहेंगे। (किन विभाग का ज्ञापांक 2561, पत्रांक 17 अप्रैल, 1998 संलग्न)
इधर पूर्व कितीत्र वर्ष 2019-20 में क्रमांक (VII) एवं (XIII) पर अंकित दोनों कोटि के शिक्षण संस्थानों में से (गा) की कोटि के माध्यमिक एवं इन्टरमीडिएट स्तर के शिक्षकों हेतु विभाग द्वारा संबंधित राशि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को भेजकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली गई जबकि आजतक की तिथि में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा यह राशि संस्थानों को नहीं भेजी गई हैं। अलबत्ता (XIII) की कोटि के संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों के शिक्षकों हेतु उपबंधित छः सौ चौबीस करोड़ रुपये बिना व्यय के ही प्रत्यर्पित हो गई जबकि दोनों ही कोटि के शिक्षकों के वेतनानुदान के लिए एक तरह की ही प्रक्रिया है। ऐसे शिक्षकों के लिए इससे गंभीर मजाक और क्या हो सकता है कि ये विगत सात-आठ वर्षों से बिना वेतन के ही कार्य करने को विवश हैं। इनके लिए घाटयनुदान आधारित वेतनमान की बात तो दूर अपने बकाये अनुदान के भुगतान की प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण ये शिक्षक आर्थिक बदहाली के शिकार है।
पुनः क्रमांक (XI) पर अंकित राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (अब ‘समग्र शिक्षा अभियान) से आच्छादित उत्तमित माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों के वेतन मद में लगभग दो वर्षों से केन्द्रांश नहीं दिये जाने के कारण वर्तमानतः इनके वेतन एवं वेतनान्तर का बजटीय प्रावधान राज्य मद से ही किया जा रहा है जो स्थायी समाधान नहीं है। अतः जब तक इन शिक्षकों का भी वेतन अथवा वेतनादि का भुगतान राजकीय राजकीयकृत परि-योजना उच्च विद्यालय के नियोजित शिक्षकों की भाँति नहीं प्रावधानित किया जाएगा तब तक इनकी समस्याओं का समाधान संभव नहीं होगा।
राज्य सरकार का यह वैधानिक दायित्व है कि राजकोष से अपने कार्य के आधार पर वेतन प्राप्तकर्ताओं को ससमय वेतन अथवा अनुदान प्रावधानित किया जाय, ताकि वे अपने आश्रितों एवं अन्य चिन्ताओं से मुक्त होकर विहित दायित्व का निर्वहन बेहतरी से कर सकें। सरकार द्वारा इस संबंध में सदन में बार-बार आश्वासन दिये जाने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। विभागीय पदाधिकारियों को शायद इसकी चिन्ता भी नहीं है क्योंकि आज 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी इससे संबंधित जबाबदेही किन्हीं पर तय नहीं किया जाना मुख्य कारण है।
इधर कक्षा बारहवीं तक के हड़ताली शिक्षकों के कार्यरत अवधि का लंबित वेतन भुगतान आज आज तक तक की तिथि में नहीं किये जाने से सरकार के दिशा-निर्देशों के साथ-साथ आपके बयानों को भी शिक्षा विभाग द्वारा चुनौती दी जा रही है जो अत्यन्त ही खेदजनक है। कोरोना’ जैसी विषाक्त स्थिति-परिस्थिति में आपका यह कथन कि किन्हीं का भी वेतन नहीं रोका जाएगा’ अथवा वा’ कोई भी वेतन से वंचित नहीं रहेंगे’ का तात्पर्य शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों को समझाने निदेशित करने की कृपा करेंगें। राज्य में सिर्फ शिक्षकों के प्रति संवेदनहीनता का इससे बड़ा और कोई उदाहरण नहीं हो सकता। और-तो-और, संविधान की शर्तों के अनुरूप हड़ताली शिक्षकों द्वारा लगभग 40-45 दिनों से जारी आंदोलन को समाप्त कराने हेतु सरकार का संघ-संगठन से वार्ता हेतु किसी भी प्रकार का पहल नहीं किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी है।
अंततः अनुरोध है कि वित्त विभाग, बिहार सरकार के ज्ञापांक 2561 पत्रांक 17 अप्रैल, 1998 के आलोक में सूबे के शिक्षकों के वेतनानुदान संबंधी उक्त वर्णित तथ्यात्मक समस्याओं अवरोधों और उसके सम्यक् समाधान हेतु निश्चित ही यथोचित कार्रवाई करना चाहेंगे। साथ ही हड़ताली शिक्षकों के कार्यरत अवधि के वेतन भुगतान तथा संघ-संगठनों से सकारात्मक एवं सम्मानजनक वार्ता हेतु अपने स्तर से भी पहल करना सुनिश्चित करेंगें।














