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टीएमबीयू अतिथि शिक्षक संघ द्वारा महाधरना का आयोजन

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यूजीसी रेगुलेशन, 2018 को दरकिनार कर बनाई गई सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली, 2026 तथा विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को समाप्त करने की मंशा से बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 को खत्म कर प्रस्तावित बिहार राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 लाने की बिहार सरकार की योजना के खिलाफ टीएमबीयू के प्रशासनिक भवन में टीएमबीयू अतिथि शिक्षक संघ द्वारा महाधरना का आयोजन किया गया । महाधरना की अध्यक्षता टीएमबीयू अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. आनन्द आजाद तथा संचालन संघ के उपाध्यक्ष डॉ. पवन कुमार ने किया ।

टीएमबीयू प्रशासनिक भवन परिसर में आयोजित इस महाधरना को तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संघ तथा बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ की टीएमबीयू प्रक्षेत्रीय इकाई समेत टीएनबी कॉलेज शिक्षक संघ, मारवाड़ी कॉलेज शिक्षक संघ तथा बीएन कॉलेज शिक्षक संघ ने अपना पूर्ण समर्थन देते हुए महाधरना में शिरकत करने का कार्य किया । बिहार विधान परिषद के सदस्य सह टीएमबीयू सिंडिकेट सदस्य डॉ. संजीव कुमार सिंह ने भी दूसरे कार्य में व्यस्त रहने के कारण कार्यक्रम में शिरकत करने से असमर्थता जताते हुए अतिथि शिक्षक संघ द्वारा आयोजित इस महाधरना को अपना नैतिक समर्थन दिया।

महाधरना को संबोधित करते हुए टीएमबीयू अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. आनन्द आजाद ने कहा कि यूजीसी रेगुलेशन, 2018 को दरकिनार कर बनाई गई सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली, 2026 को रद्द करते हुए सरकार नई नियमावली बनाकर सरकार अधिकतम आयु सीमा 43 वर्ष को बढ़ाकर 55 वर्ष करे। यूजीसी रेगुलेशन, 2018 पर आधारित नियुक्ति नियमावली, 2020 के तरह स्नातक, स्नातकोत्तर, नेट, पी-एच.डी. समेत शोध पत्र तथा अनुभव पर अंक का प्रावधान करते हुए एपीआई स्कोर आधारित नियुक्ति का प्रावधान करने के साथ-साथ सूबे के विभिन्न विश्वविद्यालयों में वर्षों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों के सेवा समायोजन का प्रावधान करे । अन्यथा, इस नियुक्ति नियमावली के खिलाफ चरणबद्ध आन्दोलन प्रारम्भ किया जाएगा।

टीएमबीयू अभिषद सदस्य सह टीएनबी कॉलेज शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. मुस्फिक आलम तथा अभिषद सदस्य सह टीएनबी कॉलेज शिक्षक संघ के सचिव डॉ. निर्लेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित बिहार राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 लागू होने से विश्ववविद्यालयों की स्वायत्तता पर नकारात्मक असर पड़ेगा । डिग्री महाविद्यालय सीधे सरकार के अधीन हो जाएगा । इससे विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वतंत्रता पर गम्भीर प्रभाव पड़ेगा । हम इस प्रस्तावित विधेयक का पुरजोर विरोध करते हैं ।

टीएमबीयू के पूर्व अभिषद सदस्य सह सेवानिवृत्त शिक्षक संघ के सचिव प्रो. अर्जुन यादव तथा भुटा के पूर्व महासचिव सह टीएमबीयू पेंशनर संघर्ष मंच के संयोजक प्रो. पवन कुमार सिंह ने कहा कि राज्यपाल सचिवालय द्वारा बनाई गई सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली, 2026 में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति हेतु अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष से घटाकर 43 वर्ष कर दी गई है । यह पूरी तरह से यूजीसी गाइडलाइन के विरुद्ध है । राज्य के विश्वविद्यालयों में वर्षों से कार्यरत कई ऐसे अतिथि शिक्षक हैं जिनकी आयु 43 वर्ष से अधिक हो गई है । ये सारे अतिथि शिक्षक यूजीसी गाइडलाइन समेत राज्य सरकार द्वारा बनाई गई पूर्व की सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली के में निर्धारित अर्हता, योग्यता एवं प्रक्रिया के आधार पर बहाल हुए हैं । राज्य सरकार यथाशीघ्र इनकी सेवा को नियमित करने का कार्य करे ।

टीएमबीयू के पूर्व कुलानुशासक प्रो. रामसेवक सिंह तथा अभिषद सदस्य डॉ. मृत्युंजय सिंह गंगा ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमला किया जाना अत्यंत चिन्ता का विषय है । विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्राप्त करने वाला संस्थान नहीं है । बल्कि, यह शिक्षण अनुसंधान, परीक्षा, पाठ्यक्रम निर्माण एवं शैक्षणिक गुणवत्ता के केन्द्र होते हैं । यदि डिग्री महाविद्यालयों को विश्वविद्यालय से अलग कर दिया जाएगा तो इससे शैक्षणिक एवं अकादमिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा ।

टीएनबी कॉलेज राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार टीएनबी कॉलेज अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. जावेद अख्तर ने कहा कि सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली, 2026 में पूर्व से कार्यरत अतिथि शिक्षकों के सेवा समायोजन के लिए कोई प्रावधान नहीं किया जाना अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण व निन्दनीय है । सरकार अविलम्ब अतिथि शिक्षकों की सेवा समायोजित कर उसे नियमित करे ।

बीएन कॉलेज, भागलपुर के प्राचार्य डॉ. अनिरुद्ध प्रसाद ने कहा कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं अकादमिक गतिविधियों के लिए इसकी स्वायत्तता बरकरार रखा जाना अत्यावश्यक है । इसकी स्वायत्तता समाप्त होने से शिक्षा जगत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

टीएमबीयू सीनेट सदस्य सह विश्वविद्यालय तृतीय वर्गीय कर्मचारी संघ के महासचिव रंजीत कुमार तथा बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के टीएमबीयू इकाई के प्रक्षेत्रीय महामंत्री सुशील मंडल एवं असीम कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता समाप्त करने की मंशा से लाए जाने वाले प्रस्तावित बिहार राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 तथा यूजीसी रेगुलेशन, 2018 को दरकिनार कर बनाई गई सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली, 2026 के विरोध में अतिथि शिक्षक संघ द्वारा आयोजित महाधरना को कर्मचारी संघ पूर्ण समर्थन करता है । इस मुद्दे पर भविष्य में भी आयोजित आन्दोलन में कर्मचारी संघ पूरी मुस्तैदी से साथ खड़ा रहेगा ।

इसके अलावे आज के महाधरना को टीएमबीयू क्रीड़ा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल, जीबी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. विभांशु मंडल, यूडीटीए सचिव डॉ. अभिषेक आनन्द, मारवाड़ी कॉलेज शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. संगीत कुमार, सचिव डॉ. सुपेन्द्र यादव, बीएन कॉलेज शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. फिरोज आलम, सचिव डॉ. अम्बिका प्रसाद, टीएनबी कॉलेज इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. रविशंकर चौधरी, टीएनबी कॉलेज संस्कृत विभाग की अध्यक्ष डॉ. सुनन्दा भारती, मारवाड़ी कॉलेज वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष प्रो. आशुतोष दत्ता, बीएन कॉलेज हिन्दी विभाग की शिक्षिका डॉ. सुजाता कुमारी तथा डॉ. दिव्या रानी, जीबी कॉलेज गणित विभाग के शिक्षक मो. अरसदुज्जमा, मारवाड़ी कॉलेज भौतिकी विभाग के शिक्षक डॉ. रविशंकर प्रसाद, डॉ. आनन्द कुमार, डॉ. स्वीटी कुमारी, डॉ. नूरजहाँ, डॉ. प्रियतम कुमार, डॉ. सर्पराज रामानन्द सागर, डॉ. आदित्य नारायण, विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के सुरेश चौधरी तथा सुधीर कुमार ने भी संबोधित किया ।

महाधरना के दौरान अतिथि शिक्षक यूजीसी रेगुलेशन के विरुद्ध बनाई गई सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली, 2026 वापस लेना होगा, अतिथि शिक्षकों की सेवा नियमित करनी होगी, अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करनी होगी, विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमला नहीं सहेंगे आदि नारे लगा रहे थे ।

कार्यक्रम के अन्त में डॉ. आनन्द सौमित्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया तथा उसके पश्चात टीएमबीयू अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. आनन्द आजाद ने कार्यक्रम के समापन की घोषणा की ।

आज के महाधरना में टीएमबीयू के विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों तथा स्नातकोत्तर विभागों में कार्यरत सैकड़ों अतिथि शिक्षक तथा नियमित शिक्षक समेत विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालय में कार्यरत कर्मचारी एवं पी-एच.डी. डिग्रीधारक मौजूद थे।

 

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वित्तीय वर्ष 2026-27 में स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय के अन्तर्गत राज्य के सभी परम्परागत विश्वविद्यालयों, अधीनस्थ अंगीभूत महाविद्यालयों में कार्यरत / सेवानिवृत्त शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के बकाया महंगाई भत्ता / बकाया महंगाई राहत की राशि के भुगतान हेतु वेतनादि / गैर-वेतनादि मद में कुल रूपये 201,62,30,312/- (दो सौ एक करोड़ बासठ लाख तीस हजार तीन सौ बारह) मात्र स्वीकृत एवं विमुक्त।

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