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BNMU स्वाधीनता का अमृत महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन एक सितंबर

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भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् शैक्षणिक केंद्र, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) द्वारा स्वाधीनता का अमृत महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 01. 09. 2021 समय दोपहर 12:30 बजे से रखा गया है।

स्वागत उदबोधन प्रो. सच्चिदानंद मिश्र, सदस्य सचिव,भा. दा. अ. परिषद् और विषय प्रवर्तन डॉ. पूजा व्यास, निदेशक, शैक्षणिक/निदेशक शोध और योजना, भा. दा. अ. परिषद् के द्वारा किया जाएगा। मुख्य वक्ता मान्यवर डॉ. बालमुकुंद पांडेय, संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली है।

कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि मान्यवर श्री संजय मिश्र, सह संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली है। अध्यक्षीय उद्धबोधन, प्रो. आर. सी. सिन्हा, अध्यक्ष, भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली है। धन्यवाद डॉ. जयशंकर सिंह, वरिष्ठ सलाहकार, शैक्षणिक केंद्र लखनऊ के द्वारा किया जाएगा हैं।

विषय-“स्वाधीनता का अमृत महोत्सव : एक विमर्श”।

आप इस व्याख्यान में सादर आमंत्रित हैं।
निवेदक-डॉ. जयशंकर सिंह, वरिष्ठ सलाहकार, भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् शैक्षणिक केंद्र, लखनऊ।

नोट- यह कार्यक्रम ऑनलाइन/ऑफ़लाइन होगा।

गूगल मिट लिंक-
https://meet.google.com/jax-wwxg-eor
यूट्यूब लिंक-

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विषय : माननीय विधान पार्षद, डॉ० संजीव कुमार सिंह एवं अन्य माननीय विधान पार्षदगण के संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्राप्त पत्र, जो बिहार में स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं राज्य की उच्च शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित है, पर यथोचित कार्रवाई करने के संबंध में।

विषय : बिहार के राज्य विश्वविद्यालयों के अंगीभूत (संघटक) स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उसके विश्वविद्यालयीय स्वायत्तता, शैक्षणिक मानकों एवं शिक्षकों की सेवा-शर्तों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में प्रतिवेदन।

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विषय : माननीय विधान पार्षद, डॉ० संजीव कुमार सिंह एवं अन्य माननीय विधान पार्षदगण के संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्राप्त पत्र, जो बिहार में स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं राज्य की उच्च शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित है, पर यथोचित कार्रवाई करने के संबंध में।

विषय : बिहार के राज्य विश्वविद्यालयों के अंगीभूत (संघटक) स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उसके विश्वविद्यालयीय स्वायत्तता, शैक्षणिक मानकों एवं शिक्षकों की सेवा-शर्तों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में प्रतिवेदन।