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BNMU *समाज को सही दिशा दे सकता है आध्यात्मिक साहित्य : कुलपति*

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*समाज को सही दिशा दे सकता है आध्यात्मिक साहित्य : कुलपति*

आज समाज में कई तरह की विकृतियाँ आ गई हैं और आम जनजीवन त्रस्त है। हमें मानव एवं समाज को इन संकटों से निकालना है।

यह बात कुलपति प्रोफेसर डॉ. आर. के. पी. रमण ने कही। वे मंगलवार को सर्वनारायण सिंह रामकुमार सिंह महाविद्यालय, सहरसा के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. अशोक कुमार सिंह तोमर के उपन्यास ‘समाधान’ का लोकार्पण कर रहे थे। यह पुस्तक विशाल प्रिंट केयर, पटना से जून 2021 में प्रकाशित हुई है।

कुलपति ने कहा कि आध्यात्मिक साहित्य के माध्यम से मानव के मनोविकारों को दूर किया जा सकता है। आध्यात्मिकता व्यक्ति को आंतरिक बल देती है। आध्यात्मिक साहित्य ही समाज को सही दिशा दे सकता है।

इस अवसर पर लेखक ने बताया कि ‘समाधान’ उपन्यास में साहित्यिक, सामाजिक एवं ऐतिहासिक विषयवस्तु का समावेश किया गया है। लेकिन यह मूलरूप से एक आध्यात्मिक उपन्यास है।

कार्यक्रम में कुलानुशासक डाॅ. विश्वनाथ विवेका, विकास पदाधिकारी डाॅ. ललन प्रसाद अद्री, असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. सुधांशु शेखर, कुलपति के निजी सहायक शंभु नारायण यादव आदि की महती भागीदारी रही।

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बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 में प्रस्तावित संशोधन के विरुद्ध विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं शिक्षक हितों की रक्षा के लिए आज बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (FUTAB) के तत्वावधान में बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक संघ एवं कर्मचारी संगठनों की संयुक्त बैठक 

विषय : माननीय विधान पार्षद, डॉ० संजीव कुमार सिंह एवं अन्य माननीय विधान पार्षदगण के संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्राप्त पत्र, जो बिहार में स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं राज्य की उच्च शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित है, पर यथोचित कार्रवाई करने के संबंध में।

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विषय : बिहार के राज्य विश्वविद्यालयों के अंगीभूत (संघटक) स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उसके विश्वविद्यालयीय स्वायत्तता, शैक्षणिक मानकों एवं शिक्षकों की सेवा-शर्तों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में प्रतिवेदन।