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BNMU विभाग के राजदूत बनकर कार्य करें पूर्ववर्ती छात्र : पूर्व कुलपति

पूर्ववर्ती छात्र परिषद् का गठन


*विभाग के राजदूत बनकर कार्य करें पूर्ववर्ती छात्र : पूर्व कुलपति*

किसी भी संस्था के लिए उसके पूर्व विद्यार्थी बहुत बडी निधि होते हैं। ये अपनी मातृ-संस्था को सेवा, से सूझाव-सलाह, नवाचारी विचार एवं वित्तीय सहायता दे सकते हैं और राजदूत बनकर अपनी मातृ-संस्था के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।‌

यह बात बीएनएमयू, मधेपुरा के पूर्व कुलपति प्रो. ज्ञानंजय द्विवेदी ने कही। वे विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभाग के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं पीएचडी शोधार्थियों की बैठक का उद्घाटन कर रहे थे।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि इस तरह सभी संस्थाओं के लिए पूर्ववर्ती छात्र परिषद् (एलूमनी एसोसिएशन) का काफी महत्व है। पूर्व विद्यार्थी दुनिया के किसी भी कोने में निवास कर रहे हो, लेकिन उनका विभाग से जुड़ाव बना रहना चाहिए। विभाग अपने इन पूर्व-विद्यार्थियों से लाभ उठा सकता है और उनकी मदद से प्रांतीय, राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर साझेदारी को मूर्त रूप दे सकता है।

*पूर्ववर्ती छात्र परिषद् का गठन एक सराहनीय कदम*

मुख्य अतिथि आईक्यूएसी निदेशक प्रो. नरेश कुमार ने कहा कि बीएनएमयू में नैक मूल्यांकन की तैयारियां चल रही हैं। इसमें पूर्ववर्ती छात्र परिषद् (एल्यूमनई एसोसिएशन) महती भूमिका निभा रहेगी।

उन्होंने बताया कि रसायनशास्त्र विभाग सहित कई विभागों में पूर्व से ही एलूमनी एसोसिएशन गठित है। इसी कड़ी में दर्शनशास्त्र विभाग में पूर्ववर्ती छात्र परिषद् का गठन एक सराहनीय कदम है।

*विभाग की बन सकेगी बेहतर पहचान*

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि विभाग अपने पूर्व-विद्यार्थियों के अनुभवों का लाभ उठाने को तत्पर है। सभी पूर्व विद्यार्थी विभाग को सहयोग करने एवं सुझाव देने हेतु आमंत्रित हैं।

उन्होंने कहा कि पूर्व विद्यार्थियों के अनुभव से अध्ययनरत विद्यार्थियों का कौशल विकास एवं क्षमता संवर्धन में मदद मिलेगी। इससे विद्यार्थियों के विभिन्न क्षेत्रों में सफल होने का प्रतिशत बढ़ेगा और विभाग की बेहतर पहचान बन सकेगी।

*विद्यार्थियों का विभाग के साथ अपनत्व बढ़ाना है उद्देश्य*

उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती छात्र परिषद् के गठन का उद्देश्य विद्यार्थियों का विभाग के साथ अपनत्व बढ़ाना और उनके अंदर गौरवभाव को जगाना है। हम विद्यार्थियों के मन में यह भाव जगाना चाहते हैं कि सभी विद्यार्थी गर्व से कह सकेंगे कि हम दर्शन विभाग के हैं और दर्शन विभाग हमारा है।

*पूर्ववर्ती छात्रों का बनेगा डेटाबेस*

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि विभाग के सभी पूर्व विद्यार्थियों के बारे में निम्नानुसार जानकारी प्राप्त किया जाएगा और उसका एक डाटाबेस तैयार होगा।विभागीय वेबसाइट पर सभी विद्यार्थियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां प्रकाशित की जाएंगी और वहां सदस्य बनने हेतु ‘पूर्ववर्ती छात्र परिषद्’ का फार्म भी उपलब्ध रहेगा। सभी विद्यार्थियों को एक वाट्सएप ग्रुप से भी जोड़ा जाएगा।

यह भी निर्णय लिया गया कि सभी पूर्ववर्ती विद्यार्थियों और खासकर पीएच. डी. शोधार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर विभाग के पुस्तकालय से पुस्तक एवं शोध पत्रिका आदि उपलब्ध कराई जाएगी।

*सौरभ कुमार चौहान एवं शक्ति सागर को संयोजक की जिम्मेदारी*

बैठक में सर्वसम्मति से सौरभ कुमार चौहान एवं शक्ति सागर को संयोजक और गगन कुमार झा एवं निधि कुमारी को सह-संयोजक बनाने का निर्णय लिया गया। आगे विस्तृत बैठक कर विधिवत अध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारियों का चयन किया जाएगा।‌ साथ ही संस्था के पंजीकरण और इसके खाते आदि के संबंध में भी आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।

इस अवसर पर असिस्टेंट प्रोफेसर विनय कुमार, सुपेन्द्र कुमार सुमन, अबरार आलम, कुंदन कुमार, खुशबू कुमारी आदि उपस्थित थे।