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Bihar विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बचाने के लिए होगा चरणबद्ध आंदोलन 

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विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बचाने के लिए होगा चरणबद्ध आंदोलन 

मधेपुरा। बीएनएमयू, मधेपुरा के शिक्षक संघ एवं कर्मचारी संघ की संयुक्त बैठक 3 अगस्त, 2026 (सोमवार) की देर शाम पार्वती विज्ञान महाविद्यालय, मधेपुरा में संपन्न हुई। इसमें यह भी निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय स्तर पर तथा सभी महाविद्यालयों में में शिक्षक संघ एवं कर्मचारी संघ को सक्रिय किया जाएगा। साथ ही दोनों संघों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया गया। इसके साथ ही विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी संयक्त संघर्ष मोर्चा द्वारा घोषित राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन को विश्वविद्यालय में मजबूती के साथ लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके सफल क्रियान्वयन हेतु एक विश्वविद्यालय स्तरीय संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया गया। इसके संयोजक प्रो. सुभाष प्रसाद सिंह एवं प्रमोद कुमार यादव बनाए गए हैं।

बैठक की संयुक्त अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुभाष प्रसाद सिंह एवं प्रमोद कुमार यादव ने कहा कि यह आंदोलन विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं उच्च शिक्षा की गरिमा की रक्षा का आंदोलन है। दोनों नेताओं ने सभी शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों से अपील की कि वे आंदोलन के प्रत्येक चरण में सक्रिय, अनुशासित एवं एकजुट भागीदारी सुनिश्चित कर इसे सफल बनाएं।

दोनों नेताओं ने आगामी आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की जानकारी दी। तदनुसार शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी पांच अगस्त से काला बिल्ला लगा कर काम करेंगे। इसके तहत पांच से आठ अगस्त तक विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी काला बिल्ला लगाकर अपने-अपने कार्यस्थलों पर विरोध दर्ज कराते हुए नियमित कार्य करेंगे। 10 अगस्त को विश्वविद्यालयों में शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहकर विश्वविद्यालय मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन करेंगे और कुलपति को ज्ञापन सौपेंगे। आगे 11 से 25 अगस्त तक प्रतिदिन अपराह्न 1.30 से दो बजे तक विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी एक स्थान पर एकत्र होकर प्रस्तावित विधेयक के विरोध में नारेबाजी, विरोध सभा एवं जनजागरण कार्यक्रम आयोजित करेंगे। शिक्षक दिवस पर पांच सितंबर को विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में छात्रों एवं अभिभावकों के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें प्रस्तावित विश्वविद्यालय विधेयक के संभावित दुष्प्रभावों से अवगत कराया जायेगा तथा उच्च शिक्षा की स्वायत्तता और गुणवत्ता की रक्षा के लिए जनसमर्थन जुटाया जायेगा।

बैठक का संचालन करते हुए शिक्षक संघ के महासचिव प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि बिहार सरकार ने विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 की जगह नया विधेयक लाने का मन बनाया है। यह प्रस्तावित विधेयक विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, शैक्षणिक स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक प्रशासनिक व्यवस्था तथा शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। इसके साथ ही यह विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के हितों के भी विपरीत होगा।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था विश्वविद्यालयों की अपने ही अंगीभूत महाविद्यालयों पर शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अधिकारिता को काफी हद तक सीमित कर देगी। शिक्षकों के पदस्थापन, स्थानांतरण, प्रतिनियुक्ति, तैनाती, प्रशासनिक नियंत्रण तथा संस्थागत संचालन से जुड़े निर्णय क्रमशः विश्वविद्यालयों के वैधानिक निकायों के स्थान पर कार्यपालिका के अधीन चले जाने की आशंका है। इससे उच्च शिक्षा का मूल स्वरूप नष्ट हो जाएगी और यह अपने मूल उद्देश्यों से भटक जाएगी।

बैठक में शामिल सभी नेताओं का स्वागत प्रधानाचार्य प्रो. पवन कुमार ने किया। धन्यवाद ज्ञापन अर्थपाल डॉ. अशोक कुमार पोद्दार एवं परीक्षा नियंत्रक डॉ. ललन कुमार ललन ने किया। इस अवसर पर उपस्थित अधिषद् सदस्यों सहित विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक एवं कर्मचारी प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। इनमें डॉ. संजीव कुमार झा, डॉ. सुधांशु शेखर, डॉ. प्रत्यक्षा राज, डॉ. दीपक कुमार राणा, डॉ. मिथिलेश कुमार, डॉ. अमरेन्द्र कुमार, डॉ. कुमारी सीमा, डॉ. कपिलदेव पासवान, डॉ. कुमारी अर्पणा, अखिलेश कुमार, मनीष कुमार सिंह, संजीव कुमार, शशांक कुमार आदि प्रमुख हैंं। बैठक में डॉ. मोनिका, अंकेश राणा, मो. तौसिफ आलम, सत्यम, ओम प्रकाश सिंह, दिलीप कुमार आदि की भी महती भागीदारी रही।

बैठक में शामिल प्रमुख नेताओं का वक्तव्य निम्न लिंक के माध्यम से सुन सकते हैं-

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