पीएचडी धारकों एवं शोधार्थियों का आमरण अनशन छठे दिन भी जारी, कांग्रेस नेताओं सहित सैकड़ों लोगों ने दिया समर्थन
“UGC एक्ट से इतर नियमों के आधार पर असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली स्वीकार नहीं” — आंदोलनकारियों की दो टूक
पटना, 09 अगस्त 2026। पटना के गर्दनीबाग स्थित धरना स्थल पर All Ph.D. Holders & Research Scholars Association of Bihar के बैनर तले पीएचडी धारकों एवं शोधार्थियों द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा आमरण अनशन एवं महाधरना छठे दिन भी जारी रहा। एसोसिएशन के संयोजक कुमुद पटेल, अभिषेक मेहता एवं बीकु सिंह प्रधान लगातार आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं।
आंदोलनकारियों की मांगों के समर्थन में आज बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, पालीगंज विधायक डॉ. संदीप सौरभ, पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा,युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष शिवप्रकाश गरीब दास,आइसा के प्रदेश अध्यक्ष एवं जे एन यू के पूर्व छात्र संघ के अध्यक्ष डॉ धनंजय,मनीषा यादव,दीपांकर मिश्रा विधान पार्षद शशि यादव गर्दनीबाग धरना स्थल पहुँचे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
धरना स्थल पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े निर्णय संविधान, यूजीसी एक्ट एवं निर्धारित नियमों के अनुरूप होने चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि यदि विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा से संबंधित नियुक्तियों में यूजीसी के निर्धारित मानकों से अलग नए नियम बनाए जाते हैं, तो इससे बिहार के हजारों युवाओं एवं शोधार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
आंदोलनकारियों ने विशेष रूप से असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति में अधिकतम आयु सीमा को लेकर उठाए गए सवालों पर सरकार से स्पष्टीकरण और पुनर्विचार की मांग की। उनका कहना है कि जब पूर्व में अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष थी, तो उसे घटाकर 43 वर्ष किए जाने का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने पुराने विश्वविद्यालय परिनियम के अनुरूप बहाली प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की और कहा कि मैं आज ही बिहार के माननीय राज्यपाल महोदय को पत्र लिखूंगा कि तुगलकी फरमान को वापस लिया जाय और सारी वस्तुस्थिति से लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी को अवगत कराउंगा।
“यह लड़ाई केवल कुछ अभ्यर्थियों की नहीं, बिहार के युवाओं के भविष्य की है”
पालीगंज के विधायक डॉ. संदीप सौरभ ने कहा कि यह केवल कुछ शोधार्थियों या अभ्यर्थियों की लड़ाई नहीं है, बल्कि बिहार के युवाओं, शोधार्थियों और उच्च शिक्षा के भविष्य का सवाल है। सरकार को आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए तत्काल संवाद स्थापित करना चाहिए।
विधान पार्षद शशि यादव ने कहा कि विश्वविद्यालयों की व्यवस्था UGC के नियमों एवं मानकों के अनुरूप चलनी चाहिए। यदि उच्च शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय स्थापित नियमों एवं मानकों के बजाय मनमाने तरीके से लिए जाएंगे, तो इसका सीधा नुकसान बिहार के युवाओं और उच्च शिक्षा व्यवस्था को होगा।
इस अवसर पर पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य अजय यादव, छात्र जदयू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम, चंदन कुमार तिवारी, रत्नेश कुमार, भीम यादव, रजनीश यादव, सोनी शर्मा, डॉ. प्रीति कुमारी सहित सैकड़ों पीएचडी धारकों एवं शोधार्थियों ने धरना स्थल को संबोधित किया और आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
वक्ताओं ने कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा एवं रोजगार से जुड़े सवालों को लेकर युवाओं में लगातार असंतोष बढ़ रहा है। सरकार को युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुनना चाहिए। बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम से भी यदि सरकार ने युवाओं के बीच उठ रहे सवालों और नाराजगी के संकेतों को नहीं समझा है, तो यह चिंता का विषय है।
आंदोलनकारियों के समर्थन में उपस्थित नेताओं एवं सामाजिक-शैक्षणिक कार्यकर्ताओं ने बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री संजय टाइगर से अपील की कि वे तत्काल अनशनकारियों से संवाद करें, उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार करें तथा आमरण अनशन समाप्त कराने की दिशा में ठोस पहल करें।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार के लिए यह संवेदनशीलता और संवाद का समय है, टकराव का नहीं। लगातार छह दिनों से आमरण अनशन पर बैठे आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य को देखते हुए सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अनशनकारियों के स्वास्थ्य के साथ कोई गंभीर अनहोनी होती है तो इसकी नैतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी सरकार की होगी। ऐसी स्थिति आने से पहले सरकार को आंदोलनकारियों से बातचीत कर समाधान का रास्ता निकालना चाहिए।
आंदोलनकारियों का संदेश
“युवाओं की आवाज को अनसुना मत कीजिए।
बिहार की उच्च शिक्षा के भविष्य को बचाइए।
संवाद कीजिए, समाधान निकालिए।”
जरीकर्ता – कुमुद पटेल
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