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ABVP ‘परिषद’ के स्थापना दिवस के बहाने…

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‘परिषद’ के स्थापना दिवस के बहाने…
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मेरे जीवन का शुरुआती समय मेरे नानी गाँव माधवपुर (खगड़िया) में बीता है। मेरे स्वतंत्रता सेनानी नानाजी श्री राम नारायण सिंह जी मुझे हमेशा ‘रामायण’ एवं ‘महाभारत’ और राष्ट्रीय नवनिर्माण से जुड़े महापुरुषों की कहानियां सुनाया करते थे। ऐसे में मैं स्वभाविक रुप से भारतीय सभ्यता- संस्कृति एवं दर्शन तथा राष्ट्र- नायकों के प्रति आकर्षित रहा। मैंने बचपन में ही स्वामी विवेकानंद, महात्मा गाँधी एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित कई महापुरुषों की जीवनियां पढ़ी।

इंटरमीडिएट में पढ़ाई के दौरान ही मुझे मेरे मित्र डॉ. मृणाल शेखर जी ने मुझसे एक रुपए लेकर मुझे स्वामी विवेकानंद को आदर्श मानने वाले राष्ट्रवादी छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) का सदस्य बना दिया था। इसके बाद मैंने ‘परिषद’ के कई कार्यक्रमों में भागीदारी की। खासकर स्वामी विवेकानंद जयंती सह राष्ट्रीय युवा दिवस पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में मुझे पुरस्कार भी मिला था।

इधर, वर्ष 2017 में भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, लालूनगर, मधेपुरा में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में योगदान करने के बाद तत्कालीन माननीय कुलपति गुरुवर प्रो. अवध किशोर राय सर ने मुझे जनसंपर्क पदाधिकारी की जिम्मेदारी दे दी। इस रूप में मैंने सभी मीडिया संस्थानों और सभी छात्र संगठनों के साथ विश्वविद्यालय का बेहतर संवाद स्थापित करने की कोशिश की। उस दौरान मेरे पूर्व परिचित डॉ. सुग्रीव दास जी (संप्रति सदस्य, बिहार राज्य बाल संरक्षण आयोग) ने मुझसे कई बार ‘परिषद्’ में कुछ दायित्व लेने का अनुरोध किया, लेकिन तब मैंने उन्हें मना कर दिया। मुझे लगा कि यदि मैं ‘परिषद’ का पदाधिकारी बन जाऊंगा, तो शायद जनसंपर्क पदाधिकारी के रूप में अन्य छात्र संगठनों के साथ न्याय नहीं कर सकूंगा।

मैं माननीय कुलपति गुरुवर प्रो. अवध किशोर राय सर एवं माननीय प्रतिकुलपति गुरुवर प्रो. फारुक अली सर के साथ विचारधारा से ऊपर उठकर सभी छात्र संगठनों तथा शैक्षणिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के वैचारिक कार्यक्रम में जाता था। इस बीच मैंने विद्यार्थी परिषद के भी कई कार्यक्रमों में भाग लिया। इसमें स्थापना दिवस और मिशन साहसी कार्यक्रम प्रमुख हैं।

यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि जब बीएनएमयू में हमारा नाम आया, तो हमें यहां योगदान करने के पूर्व कार्यालयी औपचारिकताओं को पूरा कराने में काफी संघर्ष करना पड़ा था और माननीय कुलपति गुरुवर प्रो. अवध किशोर राय सर एवं माननीय प्रति कुलपति गुरुवर प्रो. फारुक अली सर के योगदान के बाद ही हमें राहत मिली थीं। खैर यहां बस इतना बताना जरूरी है कि जब मैं योगदान के पूर्व यहां कार्यालयी प्रक्रियाओं को जानने-समझने आया था, तो मेरी मुलाकात दो छात्र नेताओं से हुई थीं- डॉ. सुमंत राव उर्फ बबलू सम्राट जी (राजद) तथा रंजन कुमार जी (अभाविप)। ऐसे में दोनों स्वाभाविक रूप से आज तक मेरे सबसे करीबी बने हुए हैं।

खासकर रंजन कुमार जी एवं उनके मित्र दिलीप कुमार ‘दिल’ ने वर्ष 2017-2022 तक लगातार प्रत्येक वर्ष मुझे परिषद् की डायरी भेंटकर सम्मानित करते रहे। इन दोनों ने मुझसे परिषद के 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को केंद्र में रखकर प्रकाशित पुस्तक ‘ध्येय-यात्रा’ की एडवांस बुकिंग भी कराई थी। मेरे जनसंपर्क पदाधिकारी बनने के बाद ‘परिषद’ से जुड़े एक छात्र नेता ने तत्कालीन कुलपति महोदय से मेरी शिकायत की थी, तब भी मुझे परिषद् के छात्र नेता द्वय रंजन कुमार जी एवं दिलीप कुमार ‘दिल’ जी के अतिरिक्त शिक्षक नेता डॉ. ललन प्रसाद अद्री जी ने भी नैतिक समर्थन दिया था।

बहरहाल गुरुवर प्रो. अवध किशोर राय सर के बाद गुरुवर प्रो. ज्ञानंजय द्विवेदी सर कुछ दिनों के लिए कुलपति के प्रभार में रहे। उन्होंने मुझे जनसंपर्क पदाधिकारी के अतिरिक्त उप कुलसचिव (शैक्षणिक) की भी जिम्मेदारी दे दी। मैंने शैक्षणिक शाखा में निदेशक प्रो. एम. आई. रहमान के साथ मिलकर काफी बेहतर कार्य किया। लेकिन कुछ लोगों ने ‘एक व्यक्ति एक पद’ सहित अन्य मुद्दों को लेकर मेरे खिलाफ आंदोलन चलाया। मैंने कुलपति महोदय से अनुरोध किया कि मुझे सभी अतिरिक्त जिम्मेदारियों से मुक्त कर मेरे पैतृक महाविद्यालय वापस कर दिया जाए। तत्कालीन कुलसचिव प्रो. मिहिर कुमार ठाकुर जी ने इसे एक अवसर के रूप में लेते हुए मुझे जनसंपर्क पदाधिकारी एवं उप कुलसचिव (शैक्षणिक) के पद से हटाकर उप कुलसचिव (स्थापना) बना दिया, ताकि मैं सीधे-सीधे उनको सहयोग कर सकूं।

इस बीच मैंने यह महसूस किया कि सभी छात्र संगठनों के लोग (जिन्होंने आंदोलन किया वे भी) व्यक्तिगत रूप से मेरा सम्मान करते हैं, लेकिन वे ‘अपना’ उसी को मानते हैं, जो उनके संगठन से जुड़ा हुआ हो- “जो सबके हैं, उसका कोई नहीं है।”

फिर मैं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय हुआ। फ़रवरी 2024 में मुझे नगर अध्यक्ष (मधेपुरा) की जिम्मेदारी मिली। मैंने अपने साथियों के साथ मिलकर स्थापना दिवस, कारगिल विजय दिवस, डॉ. अंबेडकर जयंती, डॉ. अंबेडकर परीनिर्वाण दिवस, स्वामी विवेकानंद जयंती सह राष्ट्रीय युवा दिवस आदि के अवसर पर बेहतरीन कार्यक्रम आयोजित कराए। इसके साथ ही महामना कीर्ति नारायण मंडल प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन कराया गया। इसके अलावा स्वतंत्रता दिवस एवं गणतंत्र दिवस के अवसर पर कार्यालय में ध्वजारोहण/झंडोत्तोलन के बाद समरसता सहभोज के आयोजन की शुरुआत की गई।

जनवरी 2026 में मुझे उत्तर बिहार के प्रांत उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। इस रूप में मैं अपने दायित्वों के सम्यक् निर्वह्न में लगा हूँ। इस बीच बीते छह: महिनों में मधेपुरा में ‘परिषद’ के कार्यों में काफी उतार-चढ़ाव आए हैं। इस बीच हमारे दो प्रमुख छात्र नेताओं सहित अन्य छात्रों तथा कुछ शिक्षकों को भी विश्वविद्यालय प्रशासन का काफी ‘कोप’ झेलना पड़ रहा है। लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों में भी हमारे कुछ साथी आज भी ‘सत्य’ एवं ‘न्याय’ के साथ खड़े हैं। आइए स्थापना दिवस के अवसर पर हम सभी गिले-शिकवे भुल जाएं और कदम-दर-कदम मिलाकर चलने का संकल्प लें। पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के शब्दों में, “बाधाएँ आती हैं आएँ, घिरें प्रलय की घोर घटाएँ, पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ, निज हाथों में हँसते-हँसते, आग लगाकर जलना होगा। क़दम मिलाकर चलना होगा।

हास्य-रूदन में, तूफ़ानों में, अगर असंख्यक बलिदानों में, उद्यानों में, वीरानों में, अपमानों में, सम्मानों में, उन्नत मस्तक, उभरा सीना, पीड़ाओं में पलना होगा। क़दम मिलाकर चलना होगा।

उजियारे में, अंधकार में, कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में, क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में, जीवन के शत-शत आकर्षक, अरमानों को ढलना होगा। क़दम मिलाकर चलना होगा।

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ, प्रगति चिरंतन कैसा इति अब, सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ, असफल, सफल समान मनोरथ, सब कुछ देकर कुछ न मांगते, पावस बनकर ढलना होगा। क़दम मिलाकर चलना होगा।

कुछ काँटों से सज्जित जीवन, प्रखर प्यार से वंचित यौवन, नीरवता से मुखरित मधुबन, परहित अर्पित अपना तन-मन, जीवन को शत-शत आहुति में, जलना होगा, गलना होगा। क़दम मिलाकर चलना होगा।”

विश्व के सबसे बड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP) के स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

-सुधांशु शेखर, असिस्टेंट प्रोफेसर, दर्शनशास्त्र विभाग, एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर, सुपौल।

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