BNMU। बुजुर्गों की भावनाओं एवं संवेदनाओं का सम्मान करें

बुजुर्गों की भावनाओं एवं संवेदनाओं का सम्मान करें
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मेरी माय (नानी) अभी अपने मायके से लौटी है। अंदर से बहुत खुश है; क्योंकि करीब बारह वर्षों बाद वहां गयी थी। (नानी की तबियत खराब है और लंबी यात्रा की थकान भी है, इसलिए चेहरा थोड़ा उतरा है।) नानी कई दिनों से अपने मायके जाने की जिद कर रही थी, लेकिन मामा जी तबियत खराब होने के कारण उसे जाने नहीं दे रहे थे। नानी को पता था कि मैं भी स्वास्थ्य कारणों से उसके कहीं जाने का समर्थन नहीं करूँगा। इसलिए नानी ने मुझे ‘डायरेक्ट’ नहीं बताया, लेकिन उसने मेरी बड़ी बहन से अपनी इच्छा जाहिर की। बहन ने भी डर के मारे मुझे कुछ नहीं बताया। उसने मेरे जीजा जी से चर्चा की।


… आखिर जीजा जी के माध्यम से नानी के मायके जाने की ख्वाहिश मेरे पास पहुंची। तदुपरांत मैंने नानी का पक्ष लिया और फिर … सारी बाधाएं एवं बहाने दूर। नानी खुशी-खुशी मायके जाकर लौटी। नानी के साथ बड़े मामा जी, मम्मी और बड़ी मौसी ने भी अपने ननिहाल की यात्रा की।
… और इस तीर्थ यात्रा के श्रवण कुमार बने मेरे जीजा जी विभाकर कुमार सिंह एवं बड़े भाई गुड्डू सिंह।

नोट : प्रायः नये संबंधों के साथ पुराने संबंधों में स्थिलता आ जाती है । यह एक स्वभाविक प्रक्रिया है। लेकिन हमें यथासंभव पुराने संबंधों को बचाने की कोशिश करनी चाहिए । खासकर युवाओं को यह सोचना चाहिए कि जैसे उनके लिए उनकी दोस्ती-यारी और नातेदारी प्रिय है, वैसे ही बुजुर्गों के लिए उनके संबंधों का महत्व है । अतः बुजुर्गों की भावनाओं एवं संवेदनाओं का सम्मान करें । …

11 मई, 2017

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B. N. Mandal University, Madhepura, Bihar, India

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