*गाँधी-विचार की विरासत*
(प्रो. रामजी सिंह अभिनंदन ग्रंथ)
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महाशय/महाशया!
सादर अभिवादन!
अपने पुरखों, पूर्वजों और विचार-परंपरा का स्मरण केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा निर्धारित करने का भी एक महत्त्वपूर्ण आधार है। जो समाज अपने पूर्वजों के योगदान, संघर्षों और विचारों को सहेजना नहीं जानता, वह अपनी भावी पीढ़ियों के लिए सार्थक दिशा निर्धारित नहीं कर सकता। अपनी विरासत का संरक्षण ही भविष्य के निर्माण की आधारशिला है।
इसी भावना से हमने सुप्रसिद्ध गाँधीवादी दार्शनिक, प्रख्यात शिक्षाविद्, पूर्व सांसद, पूर्व कुलपति एवं पद्मश्री सम्मान से सम्मानित प्रो. रामजी सिंह के सम्मान में एक अभिनंदन ग्रंथ के प्रकाशन का संकल्प लिया है।
प्रो. रामजी सिंह केवल एक व्यक्ति या एक विशिष्ट अकादमिक व्यक्तित्व नहीं हैं; वे एक ऐसी वैचारिक परंपरा के प्रतिनिधि हैं, जिसने गाँधी-दर्शन को अध्ययन- अध्यापन की सीमाओं से आगे ले जाकर सामाजिक जीवन, सार्वजनिक विमर्श एवं परिवर्तन की प्रक्रियाओं से जोड़ने का प्रयास किया। इनका जीवन-दर्शन, शैक्षणिक अवदान एवं सामाजिक हस्तक्षेप नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन सकता है।
इस अभिनंदन ग्रंथ का उद्देश्य केवल उनका सम्मान करना नहीं, बल्कि उनके जीवन-संघर्ष, विचार-साधना, अकादमिक योगदान, सामाजिक सरोकारों एवं मानवीय मूल्यों को प्रामाणिक सामग्री के माध्यम से भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना है। हम चाहते हैं कि यह ग्रंथ एक व्यक्ति के अभिनंदन से आगे बढ़कर गाँधी-विचार की समृद्ध परंपरा, उसके विकास और समकालीन प्रासंगिकता का महत्त्वपूर्ण दस्तावेज बने। इसलिए हम प्रो. रामजी सिंह के जीवन और योगदान का दस्तावेजीकरण करते समय उनके साथ-साथ उस शैक्षणिक एवं सामाजिक परंपरा को भी सामने लाना चाहते हैं, जिसने आजादी के बाद गाँधी-विचार के संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान दिया है। इस तरह गाँधी की संपूर्ण विरासत को समेटने का लक्ष्य रखते हुए, इसे ‘गाँधी-विचार की विरासत ‘ नाम दिया है।
*प्रथम खंड : प्रो. रामजी सिंह : जीवन एवं दर्शन*
अपेक्षित सामग्रियां : प्रो. रामजी सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व, उनका विभिन्न क्षेत्रों में योगदान, उनसे जुड़े आपके संस्मरण, व्यक्तिगत अनुभव एवं अविस्मरणीय प्रसंग और उनकी पुस्तकों की समीक्षाएँ, आलोचनात्मक मूल्यांकन एवं वैचारिक विवेचन। उनके जीवन-दर्शन, गाँधीवादी चिंतन, अहिंसा, सत्य, शांति, नैतिकता, शिक्षा, लोकतंत्र और सामाजिक परिवर्तन से जुड़े विविध आयामों पर शोधपरक आलेख।
उनके परिजनों, मित्रों, सहकर्मियों, विद्यार्थियों तथा सहयोगियों के संस्मरण एवं जीवन-परिचय। प्रो. रामजी सिंह से संबंधित संस्थाओं एवं संगठनों का विवरण।
*द्वितीय खंड : प्रो. रामजी सिंह : सामाजिक- राजनीतिक संघर्ष एवं सांगठनिक सरोकार*
प्रो. रामजी सिंह का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन एवं संपूर्ण क्रांति आंदोलन में योगदान। उनका शांति सेना, आचार्य कुल, भूदान-ग्रामदान, गांधी शांति प्रतिष्ठान, सर्व सेवा संघ आदि में योगदान। लोकसभा सदस्य के रूप में उनकी भूमिका। उनका बिहार दर्शन परिषद्, अखिल भारतीय दर्शन परिषद्, गांधी अध्ययन समिति आदि में योगदान।
*तृतीय खंड : गाँधी-विचार विभाग*
अपेक्षित सामग्रियां : गाँधी-विचार विभाग , तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की परंपरा एवं योगदान। विश्वविद्यालय के शिक्षकों, देशभर के उनसे जुड़े लोगों के संस्मरण,
विभाग के पूर्ववर्ती विद्यार्थियों के संस्मरण, अनुभव एवं विभाग से प्राप्त वैचारिक एवं शैक्षणिक प्रेरणाओं का विवरण। विभाग के पूर्व एवं वर्तमान शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से संबंधित संस्थाओं का विवरण।
*चतुर्थ खंड : परिशिष्ट*
अपेक्षित सामग्रियां : प्रो. रामजी सिंह तथा गाँधी-विचार विभाग से संबंधित कोई अन्य सामग्री, दस्तावेज, संदर्भ, चित्र या अभिलेख। प्रो. रामजी सिंह के व्याख्यानों, साक्षात्कारों एवं भाषणों की रिकार्डिंग और उनके अप्रकाशित लेखों तथा उनसे संबंधित उपयोगी दस्तावेजों की उपलब्ध प्रतियाँ।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि उपलब्ध सामग्री को केवल व्यक्तिगत स्मृति न मानकर हमारी साझा बौद्धिक एवं सामाजिक विरासत का हिस्सा समझें और उसे संकलित कर भावी पीढ़ी तक पहुंचाने में हमारा सहयोग करें।
*नोट* : कृपया, अपनी सामग्री हस्तलिखित अथवा मोबाइल या कंप्यूटर से किसी भी फॉन्ट में टाइप करके निम्न माध्यमों से उपलब्ध कराने का कष्ट करें—
व्हाट्सएप : 9934629245
ई. मेल : sudhan.ph@gmail.com
जहाँ संभव हो, सामग्री के साथ लेखक का संक्षिप्त परिचय, संबंधित व्यक्तियों के नाम, स्थान, तिथि तथा तस्वीरों या दस्तावेजों का संदर्भ भी अवश्य दें, ताकि सामग्री का उचित सत्यापन एवं सुव्यवस्थित प्रस्तुतीकरण किया जा सके। आपका सहयोग इस अभिनंदन ग्रंथ को अधिक प्रामाणिक, समृद्ध एवं उपयोगी बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सामग्रियां भेजने की अंतिम तिथि- 31 दिसंबर, 2026 है।
सादर धन्यवाद एवं सहयोग की अपेक्षा सहित।
*निवेदकगण*
प्रो. मनोज कुमार, सेवानिवृत, संस्थापक निदेशक, वर्धा समाज कार्य संस्थान, महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र)
पूर्व विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय गाँधी विचार विभाग, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर
मोबाइल-70 20601873
प्रो. विजय कुमार ,
पूर्व अध्यक्ष, विश्वविद्यालय गाँधी विचार विभाग, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर।
मोबाइल-94318 75214
डॉ. अमित रंजन सिंह, अध्यक्ष, गाँधी-विचार विभाग, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर।
मोबाइल-7992398862
डॉ. उमेश प्रसाद नीरज, असिस्टेंट प्रोफेसर (सीनियर स्केल), गाँधी विचार विभाग, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर।
मोबाइल-8340374760
डॉ. सुधांशु शेखर, संयुक्त सचिव एवं मीडिया प्रभारी, दर्शन परिषद्, बिहार।
मोबाइल- 9934629245














