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लोकप्रिय शिक्षक एवं प्रखर साहित्यकार के रूप में स्थापित हैं दशरथ प्रसाद कुलिश

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*लोकप्रिय शिक्षक एवं प्रखर साहित्यकार के रूप में स्थापित हैं दशरथ प्रसाद कुलिश*

*ताउम्र मुफलिसी में जिंदगी गुजरी,अपनी रचनाओं को नहीं करा सके प्रकाशित*

*प्रगतिशील लेखक संघ उनके साहित्यिक योगदानों को संग्रहित करने की दशा में करेगी पहल*

दशरथ प्रसाद सिंह ‘कुलिश’ (दशरथ प्रसाद कुलिश) मधेपुरा के एक लोकप्रिय शिक्षक एवं प्रखर साहित्यकार के रूप में स्थापित रहे। अक्टूबर माह 2022 में उनके निधन से कोसी क्षेत्र के साहित्यिक जगत की एक अपूरणीय क्षति हुई।उपरोक्त बाते प्रगतिशील लेखक संघ के सचिव डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर उनकी पुण्यतिथि पर प्रगतिशील लेखक संघ मधेपुरा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कही। उन्होंने कहा कि मधेपुरा के जाने-माने साहित्यकार दशरथ प्रसाद सिंह ‘कुलिश’ की कविताओं और कृतियों में कोशी क्षेत्र की मिट्टी की सोंधी महक, सामाजिक सरोकार और लोक संस्कृति की गहरी झलक देखने को मिली। 85 साल की उम्र में उन्होंने चार साल पहले 2022 में इस दुनिया से विदा ली थी।उनके संबंध में साहित्यिक गलियारे में यह बात आम थी कि बेशक उनकी जन्मभूमि मधेपुरा का ‘सुखासन’ गाँव रही लेकिन कर्मभूमि मधेपुरा रही।
• वीर रस के कवि और सम्मानित शिक्षक के रूप में अपनी अमिट पहचान बनाई।
उन्होंने स्थानीय स्तर पर साहित्य के विकास और विभिन्न प्रकाशनों में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। वे मधेपुरा और कोसी क्षेत्र के बुद्धिजीवियों में अपनी खास पहचान स्थापित की। हर बिंदुओं पर बेबाकी से अपने तल्ख अंदाज में खूब लिखा लिखी मुफलिसी में जिंदगी ताउम्र ऐसी गुजरी की उसे प्रकाशित करने में सफल नहीं रहे।डॉक्टर राठौर ने कहा कि प्रगतिशील लेखक संघ उनकी साहित्यिक देनों को संग्रहित करने की दिशा में भी पहल करेगी।प्रलेस मधेपुरा के सचिव डॉक्टर राठौर ने उनके संबंध में बताया कि उनका प्रारंभिक से लेकर अंतिम समय तक का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा उनके संबंध में पूर्व जिला जज राम लखन सिंह यादव ने कहा भी था सच लिखने वाले कलमकार की जिंदगी अक्सर संघर्षों में ही कटती है दशरथ प्रसाद कुलिश इसी कड़ी के नाम थे।
मधेपुरा के बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास में उनके योगदान के कारण उन्हें आज भी खास पहचान प्राप्त है।डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कहा कि उनके सम्मान में प्रगतिशील लेखक संघ मधेपुरा द्वारा जल्द ही एक कार्यक्रम आयोजित कर उनके साहित्यिक योगदानों पर चर्चा होगी।

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