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विद्यासागर विश्वविद्यालय में हाई-एल्टीट्यूड जीपीएस रेडियोसोंडे का सफल लॉन्च

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विद्यासागर विश्वविद्यालय में हाई-एल्टीट्यूड जीपीएस रेडियोसोंडे का सफल लॉन्च

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12 अक्टूबर मिदनापुर। विद्यासागर विश्वविद्यालय ने पूर्वी भारत में वायुमंडलीय रिसर्च और सैटेलाइट डेटा पुष्टि के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 11 अक्टूबर 2026 को दोपहर 1:22 बजे, एनआरएससी-इसरो के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर से एक एडवांस्ड जीपीएस-युक्त रेडियोसोंडे पेलोड सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (एएआई) से ज़रूरी नोटम और कलाईकुंडा डिफेंस एविएशन से एयरस्पेस की औपचारिक मंज़ूरी लेने के बाद सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए यह लॉन्च किया गया।

यह मिशन इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर के साथ संस्थागत शोध सहयोग के तहत पूरा किया गया। इसका उद्घाटन कुलपति प्रो. दीपक कुमार कर और रजिस्ट्रार डॉ. जयंत किशोर नंदी ने किया। कुलपति ने कहा कि एनआरएससी-इसरो जैसे प्रमुख राष्ट्रीय संगठन के साथ यह संयुक्त पहल, पर्यावरण और वायुमंडलीय विज्ञान के प्रति विद्यासागर विश्वविद्यालय की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस तरह के अवलोकन मौसम संबंधी शोध, खराब मौसम की भविष्यवाणी और सैटेलाइट डेटा कैलिब्रेशन में योगदान देकर सीधे तौर पर जन-कल्याण में सहायक होंगे। इस अवसर पर डॉ. काकोली कर भी उपस्थित थी।

इस पूरे मिशन की योजना, तालमेल और देखरेख पर्यावरण अध्ययन केंद्र के निदेशक डॉ. जतिशंकर बंद्योपाध्याय ने की थी। ग्राउंड स्टेशन इंटीग्रेशन, सेंसर कैलिब्रेशन, आरएफ लिंक सिंक्रोनाइज़ेशन, प्री-फ़्लाइट टेस्टिंग और बैलून लॉन्चिंग समेत पूरे टेक्निकल ऑपरेशन को विश्वविद्यालय के शोधार्थी सौम्यकांती पांडा, अविक साहा, चिन्मय खारा, राली हंसदा, शंभूनाथ जाना और प्रतीक दे ने पूरा किया। उनकी देखरेख में, फ़्लाइट के दौरान रियल-टाइम टेलीमेट्री का डेटा सही-सही हासिल किया गया।

इनके अलावा विश्वविद्यालय के अन्य फैकल्टी सदस्यों और स्टाफ़ के साथ-साथ कार्तिक बेरा (असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, डिपार्टमेंट ऑफ़ एनवायरनमेंटल स्टडीज़), अमृत कमिलिया (असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, डिपार्टमेंट ऑफ़ रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस) और अनिमेष माज़ी भी मौजूद थे।

तकनीकी जानकारी:

पेलोड में एक हल्का सेंसर और टेलीमेट्री पैकेज शामिल था, जिसका वज़न 200 ग्राम से कम था। इसे 800 ग्राम के लेटेक्स वेदर बैलून के ज़रिए ऊपर ले जाया गया। यह ट्रोपोस्फीयर से होते हुए स्ट्रेटोस्फीयर में पहुँचा और लगभग 29.4 किलोमीटर की ऊँचाई तक गया। लगभग 44.09 किलोमीटर की हॉरिजॉन्टल दूरी तय करने के बाद, पेलोड पैराशूट की मदद से ईश्वरीपुर के पास सुरक्षित रूप से उतरा।पेलोड द्वारा मापे जाने वाले पैरामीटर,वायुमंडलीय दबाव,

तेज़ प्रतिक्रिया वाले थर्मिस्टर के ज़रिए हवा का तापमान, सेंसर के ज़रिए सापेक्ष आर्द्रता, जीपीएस ट्रैकिंग के ज़रिए हवा की तीन-आयामी गति और दिशा आदि प्रमुख हैं। भविष्य में इस मिशन के जरिए इसरो के INSAT-3D / 3DR सैटेलाइट्स से मिलने वाले 19-चैनल साउंडर डेटा का सत्यापन और कैलिब्रेशन,दक्षिण बंगाल में भीषण तूफानों (जैसे काल-बैसाखी/नॉर-वेस्टर्स) की भविष्यवाणी के लिए थर्मोडायनामिक अस्थिरता और विंड शियर का विश्लेषण और डब्ल्यू आर एफ/जीएफएस रीजनल मौसम मॉडलों की भविष्यवाणी की सटीकता को बेहतर बनाया जा सकता है।विश्वविद्यालय अधिकारियों ने पुष्टि की है कि रेडियोसोंडे सिस्टम पूरी तरह से सुरक्षित है और इसमें कोई खतरनाक केमिकल या विस्फोटक पदार्थ नहीं है।

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