*असिस्टेंट प्रोफेसरों को वेतन-भुगतान शुरू होने तक मिले जीवनयापन भत्ता*
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (बीएसयूएससी), पटना के माध्यम से विगत दो-तीन वर्षों में कई विषयों में स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली हुई है। इनमें से अधिकांश विषयों के असिस्टेंट प्रोफेसरों का नियमित वेतन- भुगतान शुरू हो गया है। लेकिन राजनीति विज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान जैसे विषयों के शिक्षकों का वेतन-भुगतान शुरू नहीं हो सका है। बीएनएमयू , मधेपुरा के सीनेटर डॉ. सुधांशु शेखर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इस संबंध में कुलसचिव को पत्र लिखा है।
पत्र में मांग की गई है कि वैसे सभी असिस्टेंट प्रोफेसर, जिनक़ा नियमित वेतन- भुगतान शुरू नहीं हो सका है को उनके योगदान की तिथि से नियमित वेतन-भुगतान शुरू होने तक जीवनयापन भत्ता के रूप में प्रतिमाह विश्वविद्यालय या महाविद्यालय के आंतरिक स्रोत मद से पचास हजार रुपए मात्र अग्रिम राशि का भुगतान किया जाए।
डॉ. शेखर ने बताया कि प्रायः यह देखा जाता है कि बिहार सरकार के माध्यम से आवंटन प्राप्त करते हुए नियमित वेतन-भुगतान शुरू होने में छः माह से एक वर्ष तक का समय लग जाता है। इस बीच अर्थाभाव में नवनियुक्त शिक्षको को अपने दैनांदिन कार्यों के संपादन एवं गरिमापूर्ण जीवनयापन में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। संप्रति बीएसयूएससी, पटना के माध्यम से नवनियुक्त राजनीति विज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान के दर्जनों शिक्षक कई महिनों से बिना एक भी रूपया वेतन पाए निरंतर कार्य कर रहे हैं। वे सभी घोर अर्थाभाव झेल रहे हैं। ऐसे शिक्षकों को विश्वविद्यालय या महाविद्यालय के आंतरिक स्रोत से जीवनयापन भत्ता दिया जाना आवश्यक है।














