अमर शहीद सतीश प्रसाद झा को नमन
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आज ही के दिन, 11 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान पटना में एक ऐतिहासिक और बलिदानपूर्ण घटना घटी थी। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों ने पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने का संकल्प लिया और जुलूस की शक्ल में सचिवालय की ओर बढ़े।
सचिवालय के निकट पहुँचने पर ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। लाठीचार्ज और दमन के बावजूद विद्यार्थी और आंदोलनकारी पीछे नहीं हटे। तत्कालीन पटना के जिलाधिकारी डब्ल्यू. जी. आर्चर के आदेश पर पुलिस ने गोली चला दी। इस गोलीबारी में सात विद्यार्थी शहीद हो गए, जिसमने एक लाल अंगप्रदेश का भी था । आइए 11 अगस्त को इन सात अमर शहीदों की स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित करें ।
इन सात शहीदों में एक अंग के सतीश प्रसाद झा का भी थे। वे पटना कॉलेजिएट स्कूल के छात्र थे और मूल रूप से खड़हरा, वर्तमान बाँका जिला के निवासी थे। उस समय बाँका, भागलपुर जिले का हिस्सा था।
सतीश प्रसाद झा, पिता श्री जगदीश प्रसाद झा, ग्राम–खड़हरा, थाना–बाँका, तत्कालीन जिला–भागलपुर—यह परिचय हमें यह याद दिलाता है कि अंगप्रदेश की धरती ने भी भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने वीर सपूतों का अमूल्य बलिदान दिया था।
पटना सचिवालय की उस घटना में शहीद होने वाले सात विद्यार्थियों के नाम थे—
देवीपद चौधरी, उमाकांत प्रसाद सिन्हा, रामानंद सिंह, सतीश प्रसाद झा, जगतपति कुमार, राजेंद्र सिंह और रामगोविंद सिंह।
आज उनकी शहादत की स्मृति में उन्हें नमन करते हुए मन में एक ही प्रश्न उठता है—क्या हम उन युवाओं के बलिदान को उतनी ही गंभीरता से याद करते हैं, जितनी गंभीरता से उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने जीवन को अर्पित किया था?
अमर शहीद सतीश प्रसाद झा सहित पटना सचिवालय में सभी सात शहीदों को शत्-शत् नमन।
जय हिंद!
गांधीवादी कार्यकर्ता डॉ. मनोज मिता जी के फेसबुक वॉल से साभार।














