दर्शनशास्त्र के विद्वान शिक्षक तथा भूपेन्द्र नारायण मंडल वाणिज्य महाविद्यालय, मधेपुरा के संस्थापक प्रधानाचार्य प्रो. श्यामल किशोर यादव जी के सम्मान में श्रीकृष्ण मंदिर, गोशाला परिसर, मधेपुरा में भूपेंद्र नारायण मंडल विचार मंच के तत्वावधान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुआ।
आज लोगों में स्वार्थवाद बढ़ा है और उससे भी अधिक कृतध्नता बढ़ी है। जबतक आप सत्ता-शासन अथवा लाभ देने लायक किसी भी पोजिशन में रहते हैं तथा लोगों को आपसे काम रहता है, तो लोग आपके आगे-पीछे करते हैं। लेकिन जैसे ही आपका ‘पॉवर’ समाप्त होता है या कम होता है अथवा लोगों का काम पूरा हो जाता है, वे आपको भूला देते हैं। हद तो यह है कि जिन्होंने जीवनभर आपसे लाभ लिया होता है, वे आपकी मृत्यु के बाद श्रद्धांजलि के ‘दो शब्द’ भी खर्च करने से बचते हैं। ऐसे कठिन समय में भी प्रो. श्यामल किशोर यादव जी की श्रद्धांजलि सभा में अच्छी खासी उपस्थित रही।
इस अवसर पर वक्ताओं की लंबी फेहरिस्त (जिनमें से अधिकांश मुझसे उम्र एवं अनुभव दोनों में बड़े थे) में मुझे भी स्थान देकर संचालक डॉ. हर्षवर्धन सिंह राठौड़ ने मेरे प्रति अपने अतिरिक्त लगाव का परिचय दिया।














