आगे-आगे देखिए होता है क्या??
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बीएनएमयू, मधेपुरा के कुछ पदाधिकारी यहां के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के मार्ग में रोड़ा अटकाने के लिए नए- नए तरकीब ढूंढते रहते हैं। इस क्रम में ये लोग राज्यपाल सचिवालय द्वारा बनाए गए नियम-परिनियम को भी बदलने या उसे तोड़-मरोड़ कर पेश करने में नहीं हिचकते हैं।
इसकी दो उदाहरण अभी पीएच. डी. के संबंध में देखने को मिला है-
01. शोध-प्रबंध जमा करने हेतु निर्धारित अवधि का विस्तार का प्रवधान होने के बावजूद कई शोधार्थियों को कुछ दिनों से शोध-प्रबंध जमा करने से रोक दिया गया है।
02. आज एक पत्र जारी कर स्नातक स्तरीय महिविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को शोध-निदेशक बनने से वंचित कर दिया गया है।
हम मांग करते हैं कि विश्वविद्यालय में मनमाने नियम नहीं लागू किए जाएं।
सभी शोधार्थियों को निर्धारित अवधि तक शोध हेतु विस्तारित समय दिया जाए और विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर विभागों सहित सभी महाविद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षकों को बिना किसी भेदभाव के शोध-निदेशक बनने का अवसर दिया जाए।
आप सबों से अनुरोध है कि विश्वविद्यालय के हित में आवाज बुलंद करें। अन्यथा हम चुप रहेंगे, तो रोज नया-नया कारनामा सामने आता रहेगा। फिर हम लोगों को यही कहना पड़ेगा, ‘आगे-आगे देखिए होता है क्या!”














