मशहूर शायर पद्मश्री बशीर बद्र जी को सादर नमन।
अब वो सशरीर हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन उनकी शायरी की पंक्तियां हमे हमेशा उनकी याद दिलाती रहेंगी।
मेरे पसंद की कुछ पंक्तियां हैं-
01. “हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है।
जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा।”
02. “दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों।”
03. “लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में।”
आपको बशीर साहेब की कौन-सी शायरी पसंद है?












