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शिक्षकों पर की गई दंडात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग*

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*शिक्षकों पर की गई दंडात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग*

गत दिनों संपन्न हुए सीनेट चुनाव-2026 में शिक्षकों के मान-सम्मान का मुद्दा सर्वप्रमुख रहा। इस क्रम में यह तथ्य उजागर हुआ कि विगत कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा बार-बार शिक्षकों के मान-सम्मान को आहत किया गया है और कई शिक्षकों पर बेवजह दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उनका स्थानांतरण किया गया है।

नवनिर्वाचित सीनेट सदस्य डॉ. सुधांशु शेखर ने कुलसचिव को पत्र लिखकर शिक्षकों पर की गई दंडात्मक कार्रवाइयों को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शिक्षकों को अपमानित एवं प्रताड़ित करने के दर्जनों मामले हैं। पत्र में कुल सात मामले का जिक्र किया गया है।

उन्होंने बताया कि प्रताड़ना का पहला मामला जून 2024 का है। इस माह आर. जे. एम. कॉलेज, सहरसा के प्रधानाचार्य प्रो. राजीव सिन्हा का एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर और मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता सिन्हा का के. पी. कॉलेज, मुरलीगंज स्थानांतरण किया गया। इसके कुछ दिनों बाद ही सितंबर 2024 में डॉ. पंकज कुमार (दर्शनशास्त्र) का स्थानांतरण एच. पी. एस. कॉलेज, निर्मली-सुपौल से एच. एस. कॉलेज, उदाकिशुनगंज कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि मई 2025 में डॉ. मोहित गुप्ता (रसायनशास्त्र) का विश्वविद्यालय रसायनशास्त्र विभाग से एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर, जून 2025 में हरीश खंडेलवाल (वाणिज्य) का बी. एन. एम. वी. कॉलेज, मधेपुरा से के. पी. कॉलेज, मुरलीगंज स्थानांतरण कर दिया गया। इसके अलावा जून 2025 में डॉ. रजनीगंधा (अर्थशास्त्र) का स्थानांतरण बी. एस. एस. कॉलेज, सुपौल से एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर कर दिया गया। हाल ही में जनवरी 2026 में डॉ. कमलेश कुमार (जंतु विज्ञान विभाग) का स्थानांतरण बी. एन. एम. वी. कॉलेज, मधेपुरा से के. पी. कॉलेज, मुरलीगंज कर दिया गया।

डॉ. शेखर ने कहा है कि दंडात्मक कार्रवाई के शिकार शिक्षकों को आर्थिक एवं मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है और इसका शैक्षणिक गुणवत्ता पर भी कुप्रभाव पड़ रहा है। एक-दो शिक्षकों की सेवानिवृत्त काफी करीब है और एक-दो शिक्षक गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं। स्थानांतरण के सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सकने के कारण एक शिक्षक (डॉ. पंकज कुमार) इस दुनिया को छोड़कर चले गए।

उन्होंने कहा है कि सभी मामलों में विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई एकतरफा एवं विद्वेषपूर्ण है और ऐसा किसी- न-किसी पदाधिकारी के अहंकार की तुष्टि के लिए किया गया है। किसी भी मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अनुशासन समिति, स्थानांतरण समिति या सिंडिकेट आदि से कोई स्वीकृति नहीं ली गई है। इस तरह शिक्षकों के मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ किया गया है और उन्हें आर्थिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का कुत्सित प्रयास किया गया है।

उन्होंने कुलसचिव से अनुरोध किया है कि शिक्षकों पर की गई सभी दंडात्मक कार्रवाई वापस लिया जाए, ताकि प्रभावित शिक्षक मानसिक एवं आर्थिक संत्रास से मुक्त होकर सहज भाव से अपना कार्य कर सकें और आम शिक्षकों में व्याप्त भय एवं आशंका का कुहरा छंट सके।

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