समय का आईना और राम का मार्ग
आज हर ओर जैसे पतन की परछाइयाँ गहराती जाती हैं,
वादों की कीमत घटती है, संवेदनाएँ खोती जाती हैं।
ना छोटे-बड़े का लिहाज़, ना उम्र का सम्मान रहा,
स्वार्थ के इस शोर में जैसे हर रिश्ता अनजान रहा।
कभी-कभी खबरों में दिखती घटनाएँ चौंका जाती हैं,
मानवता की सीमा कहाँ है — ये सोचने पर मजबूर कर जाती हैं।
ऐसे दौर में फिर याद आते हैं Lord Rama के आदर्श,
जहाँ हर संबंध में मर्यादा थी, हर आचरण में था संयम और सार्थकता का अर्थ।
राम का मार्ग सिखाता है—
सम्मान ही समाज की नींव है,
और संयम ही मानवता की असली पहचान है।
रामनवमी का यही संदेश है—
दोष गिनाने से पहले, खुद को संवारना होगा,
इस बदलते समय में फिर से “मनुष्य” बनना होगा।
डिजिटल युग में जहाँ सूचनाएँ तेज़ हैं पर रिश्ते कमजोर होते जा रहे हैं, वहाँ Lord Rama का जीवन हमें सच्चे संबंध, विश्वास और कर्तव्य का महत्व याद दिलाता है। रामनवमी सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर है।”
मानसिक स्वास्थ्य के इस दौर में, जब चिंता और असंतुलन बढ़ रहा है, भगवान श्री राम का जीवन हमें धैर्य, संयम और आत्म-नियंत्रण की ताकत दिखाता है। रामनवमी हमें अपने भीतर के ‘राम’ को जागृत करने का संदेश देती है।
“ समाज तब नहीं टूटता जब बुराई बढ़ती है,
समाज तब टूटता है जब अच्छाई चुप हो जाती है।”
भीतर के अंधकार को, आज उजाला कर लें हम,
रामनवमी पर अपने मन में, फिर से राम को भर लें हम।
लेखिका:
डॉ. प्रतिभा कपाही















