जस की तस धर दीनी चदरिया
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कैसे हो सकता है सांसद फंड का बेहतर उपयोग,
वह राह राज्य सभा के उप सभापति हरिवंश जी
ने दिखा दी है।
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सुरेंद्र किशोर
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हरिवंश जी राज्य सभा के सदस्य बने ही थे कि मैंने उनसे एक मांग कर दी–मेरे गांव की सड़क के लिए अपने फंड से कुछ राशि दे दीजिए।
उन्होंने टका सा जवाब दे दिया–मैं अपने फंड का इस्तेमाल शिक्षण
संस्थाओं के लिए करता हूं।
मुझे यह सुनकर बहुत अच्छा लगा।क्योंकि मैं जानता रहा हूं कि इस फंड में किस तरह कमीशन खोरी होती रही है।
हाल में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का बयान अखबारों में पढ़ा।स्पष्टवादी मांझी जी ने कहा कि ‘‘हर एम.पी.-विधायक फंड में कमीशन लेता है।मैं भी लेता हूं।’’
मांझी जी यह भूल गए कि हर नियम का अपवाद भी होता है।कुछ लोग पहले भी नहीं लेते थे।आज भी कुछ लोग नहीं लेते हैं।
हरिवंश जी भी उनमें एक रहे हैं।
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शिक्षण संस्था को एकमुश्त फंड दे देने से सांसद को न तो ठेकेदार से संपर्क होता है और न ही किसी अन्य संबंधित ‘‘तत्व’’ से।
संतोष सिंह ने अपने फेसबुक वाॅल पर हरिवंश जी के फंड उपयोग का पूरा विवरण दिया है।
संतोष जी ने लिखा है कि ‘‘हरिवंश जी ने राज्य सभा सदस्य के रूप में 2014 से लेकर राज्य सभा में उनके दिए विदाई भाषण से पूर्व तक जो उन्होंने बिहार में शिक्षा क्रांति की है,वह अतुलनीय हैं।
अपने सांसद निधि से उन्होंने नए ज्ञान केंद्रों की स्थापना की है।
बिहार के युवक-युवतियों के भविष्य के लिए उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।’’
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सांसद राशि आवंटन विवरण
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1. आर्य भट्ट नालेज यूनिवर्सिटी,पटना
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नदी अध्ययन केंद्र–4 करोड़ 27 लाख रुपए
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2. आईआईटी-पटना–सेंटर फाॅर लैंग्वेज स्टडीज –9 करोड़ 87 लाख रुपए।
सेंटर फाॅर अर्थक्वेक इंजीनियरिंग रिसर्च–7 करोड़ 10 लाख रुपए।
3. चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, पटना–बिजनेस इनक्यूवेशन एवं इनोवेशन फांउडेशन
सेंटर फाॅर पब्लिक पाॅलिसी-9 करोड़ 43 लाख रुपए।
4. मगध विश्व विद्यालय,गया-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर-20 करोड़ रुपए
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हरिवंश जी ने इसके साथ ही अघोषित रूप से अन्य सांसदों-विधायकों को भी यह मौन संदेश दे दिया है कि वे अपने -अपने क्षेत्रों में फंड के जरिए किए गए कामों को सोशल मीडिया पर प्रचारित कर सकते हैं।
उन कार्य स्थलों को देख कर लोगबाग यह तय कर लेंगे कि किसने जीतनराम मांझी की बात को सही साबित किया है और किसने गलत साबित कर दिया है।
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इससे इस फंड और इसके जरिए राजनीति व प्रशासन की नाहक बदनामी नहीं होगी।
कम से कम अब हरिवंश जी के फंड के बारे में नकारात्मक बात बोलने की हिम्मत किसी को नहीं होगी।मांझी जी भी अगली बार कहेंगे कि हर नियम का अपवाद भी होता है।
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बिहार पुलिस के डी.जी.पी.,डी.एन.गौतम जब सेवा निवृत हुए थे तो मैंने प्रभात खबर में उन पर एक बड़ा लेख लिखा था।उसका शीर्षक था–‘‘जस की तस धर दीनी चदरिया।’’
आज मैंने अपने पेशे यानी पत्रकारिता के क्षेत्र से निकल कर ‘‘काजल की कोठरी’’ में प्रवेश करके बेदाग निकल जाने वाले हरिवंश जी के बारे में भी लिखा है –
‘‘तस की तस धर दीनी चदरिया।’’
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26 मार्च 26
वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र किशोर जी के फेसबुक वॉल से।














