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‘धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी।।”

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‘धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी।।”

(अर्थात् धैर्य, धर्म, मित्र एवं जीवनसंगिनी की परख आपत्ति के समय ही होती है।)

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