Search
Close this search box.

पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस आर. रंगनाथन की 133वीं जयंती मनाई गई।

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ. एस आर. रंगनाथन की 133वीं जयंती मनाई गई।

आज दिनांक 12अगस्त 2025 को बीएन मंडल विश्वविद्यालय पुस्तकालय एवं सूचना विभाग में पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ एस आर रंगनाथन की 133 वी जयंती के अवसर पर लाइब्रेरियन डे मनाया गया ।

कार्यक्रम का शुरुआत एस आर रंगनाथन जी के तैलीय चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुस्तकालय सूचना एवं विज्ञान विभाग पूर्ववर्ती छात्र संघ के सदस्य राहुल यादव ने कहा कि एस. आर. रंगनाथन (9 अगस्त, 1892 – 27 सितंबर, 1972) एक प्रसिद्ध भारतीय पुस्तकालयाध्यक्ष, गणितज्ञ, और शिक्षाविद थे। उन्हें भारत में पुस्तकालय विज्ञान का जनक माना जाता है। उन्होंने पुस्तकालय विज्ञान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए, जिनमें “पुस्तकालय विज्ञान के पाँच नियम” और “कोलन वर्गीकरण” प्रमुख हैं।

इस अवसर पर कार्यक्रम में सिद्धू कुमार, नमन कुमार,राजेश कुमार, सुभाष कुमार,बिट्टू कुमार, गुलशन कुमार, मीना कुमारी, रेणु कुमारी सहित अन्य उपस्थित रहे।

READ MORE

विषय : माननीय विधान पार्षद, डॉ० संजीव कुमार सिंह एवं अन्य माननीय विधान पार्षदगण के संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्राप्त पत्र, जो बिहार में स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं राज्य की उच्च शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित है, पर यथोचित कार्रवाई करने के संबंध में।

विषय : बिहार के राज्य विश्वविद्यालयों के अंगीभूत (संघटक) स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उसके विश्वविद्यालयीय स्वायत्तता, शैक्षणिक मानकों एवं शिक्षकों की सेवा-शर्तों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में प्रतिवेदन।

[the_ad id="32069"]

READ MORE

विषय : माननीय विधान पार्षद, डॉ० संजीव कुमार सिंह एवं अन्य माननीय विधान पार्षदगण के संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्राप्त पत्र, जो बिहार में स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं राज्य की उच्च शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित है, पर यथोचित कार्रवाई करने के संबंध में।

विषय : बिहार के राज्य विश्वविद्यालयों के अंगीभूत (संघटक) स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उसके विश्वविद्यालयीय स्वायत्तता, शैक्षणिक मानकों एवं शिक्षकों की सेवा-शर्तों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में प्रतिवेदन।