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‘इकोनोमिक्स’-‘मैथमेटिक्स’ एवं ‘फिलॉसफी’

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‘इकोनोमिक्स’-‘मैथमेटिक्स’ एवं ‘फिलॉसफी’

‘इकोनोमिक्स’, ‘मैथमेटिक्स’ एवं ‘फिलॉसफी’ तीनों महत्वपूर्ण विषय है। ‘इकोनोमिक्स’ मुझे कभी भी पसंद नहीं रहा है और मैंने इसकी पढ़ाई नहीं के बराबर की है। लेकिन मैंने इंटरमीडिएट तक ‘मैथ’ की पढ़ाई की है और मैं इसमें अपेक्षाकृत बेहतर भी था।

लेकिन स्नातक में मैंने ‘मैथ’ से किनारा कर लिया और ‘फिलॉसफी’ की ओर बढ़ गया। अब तो ‘फिलॉसफी’ ही मेरे जीवन एवं जीविका का सहारा है। मैं हमेशा अपनी ‘फिलॉसफी’ के अनुसार कार्य करता हूँ और मेरी कोशिश रहती है कि तर्कसंगत ढंग से कार्य करूँ और नैतिक मापदंडों पर खरा उतरूँ।

आज प्रसंगवश ‘फिलॉसफी’ से अधिक ‘इकोनोमिक्स’ एवं ‘मैथमेटिक्स’ की याद आ रही है। जहां तक मुझे जानकारी है ‘इकोनोमिक्स’ में ‘लेबर’ बढ़ाने पर ‘प्रोडक्शन’ बढ़ता है और ‘मैथमेटिक्स’ में किसी भी संख्या में धनात्मक संख्या जोड़ने पर उसका मूल्य बढ़ता है। लेकिन जिंदगी ‘इकोनोमिक्स’ एवं ‘मेथेमेटिक्स’ नहीं है। यहाँ ‘इकोनोमिक्स’ एवं ‘मेथेमेटिक्स का यह नियम उल्टा भी लागू हो सकता है। आसान शब्दों में आपके द्वारा ज्यादा काम करना आपके लिए ‘निगेटिव’ साबित हो सकता है।

खैर, …

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विषय : माननीय विधान पार्षद, डॉ० संजीव कुमार सिंह एवं अन्य माननीय विधान पार्षदगण के संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्राप्त पत्र, जो बिहार में स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं राज्य की उच्च शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित है, पर यथोचित कार्रवाई करने के संबंध में।

विषय : बिहार के राज्य विश्वविद्यालयों के अंगीभूत (संघटक) स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन तथा उसके विश्वविद्यालयीय स्वायत्तता, शैक्षणिक मानकों एवं शिक्षकों की सेवा-शर्तों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में प्रतिवेदन।

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