सुप्रसिद्ध दार्शनिक प्रो. राजेन्द्र प्रसाद जी का निधन हो गया है। विनम्र श्रद्धांजलि…🙏🙏
संक्षिप्त परिचय
सुप्रसिद्ध दार्शनिक प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने पटना विश्वविद्यालय, पटना और मिशिगन विश्वविद्यालय, अमेरिका से शिक्षा प्राप्त की थी। वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर में दर्शनशास्त्र के वरिष्ठ प्रोफेसर और मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के प्रमुख रहे थे। वे फुलब्राइट फेलो, रॉकफेलर फाउंडेशन फेलो तथा आईसीपीआर के राष्ट्रीय फेलो भी रहे हैं। उन्होंने अखिल भारतीय दर्शन परिषद और भारतीय दार्शनिक कांग्रेस में भी विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया था।
प्रो. प्रसाद की पुस्तकें बौद्धिक जगत के साथ-साथ दर्शन के आम जिज्ञासुओं के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं। उनकी प्रमुख प्रकाशित रचनाओं में ‘दर्शन शास्त्र की रूपरेखा’ (हिंदी), ‘ नियमितता, मानक और भाषा के नियम’, ‘कर्म, कारण और प्रतिशोधात्मक नैतिकता’, ‘सौंदर्यशास्त्र, नैतिकता और जीवनमुक्ति’ और ‘निजी और सार्वजनिक जीवन में लक्ष्य और साधन’ (संपादित) शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने भारत और विदेश के कई प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में अनेक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। उन्होंने ‘इंडियन रिव्यू ऑफ फिलॉसफी’ एवं ‘दार्शनिक त्रैमासिक’ पत्रिकाओं का संपादन किया है और वर्तमान में वे ‘इंडियन फिलॉसॉफिकल क्वार्टरली’ और ‘पारमर्श’ के सह-संपादक रहे ।
प्रो. प्रसाद की प्रमुख कृतियां हैं-
1. “दर्शनशास्त्र की रूपरेखा” (हिंदी), 1954, 10 बार पुनर्मुद्रित और संशोधित।
2. “भाषा के नियम”, पूना विश्वविद्यालय, पुणे, भारत, 1989।
3. “कर्म, कारण और प्रतिशोधात्मक नैतिकता’, आईसीपीआर, नई दिल्ली, 1989।
4. ‘वर्णधर्म, निष्काम कर्म और व्यावहारिक नैतिकता, व्यावहारिक नैतिकता पर एक आलोचनात्मक निबंध’, डीके प्रिंटवर्ल्ड, नई दिल्ली, 2000।
5. ‘धर्मकीर्ति का अनुमान सिद्धांत : पुनर्मूल्यांकन और पुनर्निर्माण’, 2002, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, नई दिल्ली।
6. ‘सौंदर्यशास्त्र, नैतिकता और जीवनमुक्ति’, कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़, कर्नाटक, 1992।
7. ‘निजी और सार्वजनिक जीवन में लक्ष्य और साधन’ (संपादन), आईआईएएस, शिमला, 1989।
8. “भारतीय नैतिक दर्शन: अवधारणात्मक और विश्लेषण।’
9. ‘भारतीय नैतिक दर्शन: ऐतिहासिक और विकासात्मक’ (संपादन) ।
10. लेख: भारतीय और विदेशी पत्रिकाओं में 125












