*साहित्य समाज को दिशा देने वाली मशाल*
प्रगतिशील लेखक संघ,मधेपुरा का जिला सम्मेलन बुधवार को जिला मुख्यालय के सार्क इंटरनेशनल स्कूल परिसर में आयोजित किया गया। चर्चित विचारक,लेखक पूर्व कुलसचिवप्रो. सचिंद्र महतो की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत दीप प्रज्वलित एवं अतिथियों द्वारा प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े स्मृतिशेष साहित्यकारों को पुष्पांजलि अर्पित कर हुई।
उसके उपरांत स्वागताध्यक्ष ख्यातिप्राप्त वरीय साहित्यकार प्रो विनय कुमार चौधरी ने अतिथियों का अंगवस्त्र,मोमेंटो,पुस्तक और सम्मेलन विशेष किट से सम्मानित किया ।उसके उपरांत स्वागत भाषण देते एवं प्रगतिशील लेखक संघ का संक्षिप्त परिचय देते प्रो. विनय कुमार चौधरी ने कहा कि यह संगठन देश का सबसे पुराना साहित्यिक संगठन है जिसकी बुनियाद 1936 में प्रेमचंद सरीखे हिंदी उर्दू के कथा सम्राट प्रेमचंद की अध्यक्षता रखी गई थी।
अपने उद्घाटन एवं अध्यक्षीय उद्बोधन में पूर्व कुलसचिव प्रो सचिन्द्र महतो ने कहा कि प्रगतिशील लेखक संघ को आजादी के दौर में वैचारिक रूप से स्वतंत्रता आंदोलन को धार देने का गौरव प्राप्त है आजादी के लगभग आठ दशक बाद भी यह संगठन निरंतर अपनी उपयोगिता साबित कर रही है।इस कड़ी में मधेपुरा जिला सम्मेलन इस क्षेत्र की साहित्यिक पृष्ठभूमि में जान डालने वाली साबित होगी।
*साहित्य समाज को मशाल दिखाती है*
*समाज और साहित्य* विषय पर परिचर्चा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता प्रगतिशील लेखक संघ, बिहार के महासचिव अनीश अंकुर ने कहा कि साहित्य समाज सृजन की धुरी है।समाज की दशा और दिशा साहित्य तय करती है जिस दौर का साहित्य जितना समृद्ध होगा उस दौर का समाज भी उतना ही परिपक्व ।साहित्य समाज को मशाल दिखाती है और महत्वपूर्ण चीजों को सहेजकर भविष्य को दिशा देती है।उन्होंने कहा कि साहित्य को समाज का प्रहरी होना चाहिए।साहित्य और समाज से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर प्रेमचंद,नागार्जुन आदि से जुड़े उद्धरण को रखते हुए कहा कि समाज और साहित्य को एक दूसरे से अलग नहीं कर सकते।
मुख्य अतिथि प्रलेस के प्रांतीय सचिव जय प्रकाश यादव ने कहा कि साहित्य राजनीति के आगे चलने वाली मशाल है।साहित्य समाज की दर्पण है,,,,,,,,
परिचर्चा को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि समाजसेवी चंद्रशेखर ने समाज और साहित्य को वर्तमान दौर में सर्वाधिक प्रासंगिक बताया।कार्यक्रम को वरीय साहित्यकार श्यामल पथिक,कवि जी, चर्चित साहित्यकार पीजी हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो सिद्धेश्वर कश्यप,प्रो शंभू शरण भारतीय,गणेश मानव,मणिभूषण वर्मा, आदि ने भी संबोधित करते हुए कहा कि समाज और साहित्य एक दूसरे के पूरक हैं।साहित्य समाज की धुरी है इसलिए इसे हमेशा सक्रिय रहने की जरूरत है।विषय प्रवेश चर्चित बेबाक वक्ता रमन कुमार ने किया ।
धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक सह मंच संचालक डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने किया।कार्यक्रम का आगाज हो _गई है पर्वत पीर पिघलनी चाहिए,,, हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए_ गीत के साथ हुई। वहीं तू जिंदा है तो जिंदगी के जीत पर यकीन कर जनगीत के साथ समापन हुआ।इस अवसर पर वाम विचारक प्रमोद प्रभाकर,प्रो आलोक कुमार,शैलेन्द्र कुमार,विनीता भारती, इंजिनियर मुरारी,सोनम आजाद,शंकर कुमार, आद्यानंद यादव,मदन कुमार,सजन कुमार,मुख्य रूप से उपस्थित रहें।कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रो प्रसन्ना कुमारी,जैद,आर्यन,शाकिब की विशेष भूमिका रही।













