बीएनएमयू, मधेपुरा और टीएमबीयू, भागलपुर में स्नातक स्तरीय महिविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को पीएच. डी. शोध-निदेशक बनने से रोकने का निर्णय राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी पीएचडी अधिनियम का सीधा-सीधा उल्लंघन है। दोनों विश्वविद्यालयों का यह निर्णय यह शिक्षकों एवं शोधार्थियों के अधिकारियों पर कुठाराघात है।
आप सभी जानते हैं कि विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय के सभी कार्य कुलपति के आदेशानुसार ही होते हैं। लेकिन बीएनएमयू, मधेपुरा के कुलपति हमेशा विश्वविद्यालय के गलत निर्णयों की जिम्मेदारी अपने अधिनस्थों पर थोपकर स्वयं बाल-बाल बचकर निकलने की कला में माहिर हैं। लेकिन शायद इस बार वे अपनी कलाकारी नहीं दिखा सकेंगे। क्योंकि दोनों विश्वविद्यालयों, जहां वे कुलपति हैं एक जैसा निर्णय हुआ है, जबकि उनके अधिनस्थ काम करने वाले लोग अलग-अलग हैं।
टीएमबीयू, भागलपुर में इस मामले पर विरोध दर्ज करने वाले सिंडिकेट सदस्य डॉ. निर्लेश कुमार यादव भाई को बहुत-बहुत साधुवाद और पूरे मामले को ठीक ढंग से लोगों के बीच लाने के लिए दैनिक भास्कर, भागलपुर के वरिष्ठ पत्रकार मित्रवर अभिषेक कुमार जी को बहुत-बहुत धन्यवाद।













