*विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बचाने के लिए आक्रोश मार्च*
कुलपति को सौंपा गया ज्ञापन
मधेपुरा। बीएनएमयू, मधेपुरा के शिक्षक संघ एवं कर्मचारी संघ के संयुक्त संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में सोमवार को ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय से विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन तक आक्रोश मार्च निकाला गया। इस क्रम में आंदोलनकारियों द्वारा विश्वविद्यालय मुख्यालय में प्रदर्शन करते हुए कुलपति को ज्ञापन सौंपा गया।
कार्यक्रम के संयोजक द्वय प्रो. सुभाष प्रसाद सिंह एवं प्रमोद कुमार यादव ने कहा कि विनम्रता पूर्वक कहना है कि सन् 1949 में भारत के दूसरे माननीय राष्ट्रपति एवं नामचीन शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन की अध्यक्षता में तत्कालीन भारत सरकार द्वारा गठित यूनिवर्सिटी एजूकेशन कमीशन के रिपोर्ट में आजाद भारत में विश्वविद्यालय की स्थापना एवं मकशद का विवरण दिया गया है। इसमें भारत के उच्च शिक्षा को पूर्ण स्वायत्तता देने की वकालत की गई है। इसी रिपोर्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के क्रम में यूजीसी की स्थापना की गई। इसमें कहा गया है कि उच्च शिक्षा प्रदान करना राज्य का दायित्व है, परन्तु राज्य की सहायता को शैक्षणिक नीतियों और कार्यप्रणालियों पर राज्य के नियंत्रण का कारण नहीं बनाया जाना चाहिए।
नेता द्वय ने कहा कि उच्च शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षकों को विवादास्पद विषयों पर भी अपने विचार व्यक्त करने की उतनी ही स्वतंत्रता होनी चाहिए जितनी किसी स्वतंत्र देश में अन्य नागरिकों को है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन के विश्वविद्यालय को जो सम्मान प्राप्त है, उसका मुख्य कारण यह है कि वे संवैधानिक रूप से एवं व्यवहार में भी सरकारी हस्तक्षेप से मुक्त हैं। विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय को सरकार के नियंत्रण से मुक्त होना चाहिए।
इस अवसर पर शिक्षक संघ के महासचिव प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 को निरस्त कर नया विश्वविद्यालय विधेयक 2026 लाने की तैयारी चल रही है। इससे आंदोलन विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, लोकतांत्रिक मूल्य एवं उच्च शिक्षा की गरिमा के नष्ट होने की आशंका है। इसके खिलाफ सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों द्वारा एकजुट होकर चरणबद्ध आंदोलन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बीएनएमयू में भी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से राज्यस्तर पर निर्धारित सभी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में कुलपति को ज्ञापन देकर उनसे अनुरोध किया गया है कि शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भावना एवं मांग से राज्यपाल- सह- कुलाधिपति, मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री को अवगत कराया जाए।
इस अवसर पर उपस्थित अधिषद् सदस्यों सहित विभिन्न महाविद्यालयों एवं स्नातकोत्तर विभागों के शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित थे। शिक्षकों की ओर से प्रो. नरेश कुमार, प्रो. राणा सुनील कुमार सिंह, प्रो. मो. अबुल फजल, डॉ. संजीव शंकर सिंह, डॉ. संजीव कुमार झा, डॉ. सुधांशु शेखर, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. अमरेंद्र कुमार, डॉ. दीपक कुमार राणा, डॉ. सुभाषचन्द्र राम, डॉ. प्रत्यक्षा राज, डॉ. शेफालिका शेखर, डॉ. कुमारी सीमा, डॉ. रत्नदीप, डॉ. बिमला कुमारी, डॉ. अतुलेश्वर झा, डॉ. उपेन्द्र प्रसाद यादव, डॉ. अरुण कुमार सिंह, डॉ. शंकर कुमार मिश्र, डॉ. मोहित गुप्ता, डॉ. निहारिका प्रजापति, ले. गुड्ड कुमार, डॉ. आनंद कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार, डॉ. ललन कुमार ललन, डॉ. मो. मतीन, शशिकांत कुमार, प्रियंका, डॉ. अनीता, डॉ. अनामिका, डॉ. नीलू कुमारी, डॉ. सुधा कुमारी आदि उपस्थित थे। कर्मचारियों की ओर से सीनेटर वैभव कुमार, प्रक्षेत्रीय अध्यक्ष अखिलेश कुमार, पृथ्वीराज यदुवंशी, शैलेन्द्र मिश्र, मनीष कुमार सिंह, अंकेश राणा, लखन कुमार, सुजीत कुमार, डॉ. अखिल सिंह परमार, वीरेंद्र ठाकुर, गौतम कुमार सिंह, नारायण ठाकुर, सुजीत, गजेन्द्र यादव, श्रवण मिश्रा, शशिनाथ यादव, नंद किशोर यादव, कुंदन सिंह, मृत्युंजय कुमार, दिलीप कुमार आदि की भी महती भागीदारी रही।
*सामूहिक अवकाश पर रहे शिक्षक एवं कर्मचारी*
विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बचाओ आंदोलन के तहत सोमवार को शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर रहकर विश्वविद्यालय मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन किया और कुलपति को ज्ञापन सौंपा। आगे 11 से 25 अगस्त तक प्रतिदिन अपराह्न 1.30 से दो बजे तक विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी एक स्थान पर एकत्र होकर प्रस्तावित विधेयक के विरोध में नारेबाजी, विरोध सभा एवं जनजागरण कार्यक्रम आयोजित करेंगे। शिक्षक दिवस पर पांच सितंबर को विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में छात्रों एवं अभिभावकों के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें प्रस्तावित विश्वविद्यालय विधेयक के संभावित दुष्प्रभावों से अवगत कराया जायेगा तथा उच्च शिक्षा की स्वायत्तता और गुणवत्ता की रक्षा के लिए जनसमर्थन जुटाया जायेगा।
-सुधांशु शेखर, सीनेट सदस्य, बीएनएमयू, मधेपुरा।













