*विशेषज्ञ की राय*
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“परीक्षा भवन में बेहतर प्रदर्शन कर अच्छा अंक लाना एक कला है। इसके लिए सबसे पहले परीक्षा पैटर्न को समझना जरूरी है। इसके बाद निर्धारित समय पर तय शब्द-सीमा में उत्तर लिखने का अभ्यास किया जाना आवश्यक है। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि उत्तर में अनावश्यक बातें नहीं लिखी जाएं। कई बार एक-दो पंक्तियों में आई अनावश्यक बातें पूरे उत्तर पर नकारात्मक प्रभाव डाल देती हैं।”
बीएनएमयू, मधेपुरा प्रशासन द्वारा सभी स्नातक स्तरीय महाविद्यालय के शिक्षकों को दोयम दर्जे का माना जाता है और इसमें भी एचपीएस कॉलेज, निर्मली सुपौल तथा एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर (सुपौल) को तो ‘काला पानी’ घोषित कर दिया गया है। विश्वविद्यालय के कई शिक्षकों को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से इन दोनों कॉलेजों में भेजा जाता रहा है। आज ऐसे ही एक पीड़ित-प्रताड़ित व्यक्ति की राय प्रकाशित हुई है। यह किसी ‘विशेषज्ञ’ शिक्षक की राय से अधिक एक सामान्य विद्यार्थी का अनुभव है।
आशा है कि अभी विभिन्न कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को हमारे अनुभव से कुछ लाभ मिल सकेगा।
-डॉ. सुधांशु शेखर,
अध्यक्ष, दर्शनशास्त्र विभाग, एल. एन. एम. एस. कॉलेज, वीरपुर (सुपौल)














