“लेलकै ‘नरेना’ दोनों घरेना।”
——–
बीएनएमयू, मधेपुरा के बाद टीएमबीयू, भागलपुर में भी राज्यपाल सचिवालय, बिहार लोक भवन, पटना द्वारा जारी पीएच. डी. रेगुलेशन की भावनाओं के विरुद्ध पत्र जारी किया गया है और स्नातक स्तरीय महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को पीएच. डी. शोध-निदेशक बनने से वंचित कर दिया गया है। हम सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से अनुरोध करते हैं कि इस पत्र का पुरजोर विरोध किया जाए। इसके साथ ही माननीय राज्यपाल-सह-कुलाधिपति महोदय से विनम्र प्रार्थना है कि इसे संज्ञान में लेकर समुचित कार्रवाई करने का कष्ट किया जाए।
नोट : गत दिनों बांकीपुर में संपन्न हुए उपचुनाव में भाजपा की करारी के बाद मैंने अपने बड़े मामाजी श्री राम नगीना सिंह जी कि एक बात आपसे साझा की थी, “अहंकार ईश्वर का आहार है।” देखते हैं कि मामाजी की यह बात इस मामले में सही होती है या नहीं। फिलहाल तो मामाजी की एक दूसरी बात अक्षरश: सही होती प्रतीत हो रही है, “लेलकै ‘नरेना’ दोनों घरेना।”














