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भूपेन बाबू ने 1967 में मंत्री पद ठुकरा दिया था

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भूपेन बाबू ने 1967 में मंत्री पद ठुकरा दिया था
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(उन दिनों कैबिनेट मंत्री आज की
अपेक्षा अधिक प्रभावकारी होता था)
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सुरेंद्र किशोर
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आज सुबह-सुबह जब मैं अपनी पुस्तकों की आलमारी पर नजर दौड़ा रहा था तो
शरदेन्दु कुमार लिखित भूपेन्द्र नारायण मंडल की जीवनी पर नजर पड़ी।
मैंने सोचा कि आज की पीढ़ी को ऐसे नेताओं के बारे में बताऊं जिन्होंने
अपने राजनीतिक करिअर की अपेक्षा समाज व राजनीतिक शुचिता के बारे में अधिक सोचा-किया।
जब-जब मैं आज के अधिकतर तथाकथित समाजवादियों के चाल,चरित्र और चेहरे पर गौर करता हूं, मुझे अनायास भूपेन बाबू यानी भूपेन्द्र नारायण मंडल जैसे नेता याद आ जाते हैं।समाजवादी आन्दोलन में मेरे मार्ग दर्शक अम्बिका प्रसाद सिंह ‘दादा’ से मैंने साठ-सत्तर के दशकांे में ही भूपेन बाबू के बारे में सुन रखा था।उनके भाषण भी सुने थे।
ध्यान रहे , मैंने 1967 से 1976 तक लोहिया वाली समाजवादी जमात में रह कर पूर्णकालिक कार्यकत्र्ता के रूप में काम किया था।सन 1977 में दैनिक ‘आज’ के साथ मुख्य धारा की पत्रकारिता में शामिल हो गया जब देखा कि राजनीति मेरे वश की बात नहीं है।
मैं लोहिया से लेकर तब के अन्य अनेक छोटे- बड़े समाजवादियों को बाहर-भीतर से जानता रहा हूं।
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भूपेन्द्र नारायण मंडल लगातार डा.राम मनोहर लोहिया के साथ रहे।साथ रहना यानी उनकी बातें मानना।उनकी नीतियों पर चलना।
सन 1957 में भूपेन बाबू लोहिया जी के दल के बिहार में एक मात्र विधायक थे।मधेपुरा से चुने गये थे।
1967 में जब बिहार में महामाया प्रसाद सिन्हा के नेतृत्व में संयुक्त मोर्चा की सरकार बन रही थी तो संसोपा के प्रमुख नेताओं कर्पूरी ठाकुर और रामानन्द तिवारी ने भूपेन बाबू से मिलकर उनसे कहा कि आप मंत्री बन जाइए।
भूपेन बाबू ने कहा कि ऐसा करने से लोहिया जी बुरा मानेंगे।मैं राज्य सभा का सदस्य हूं।लोहिया जी चाहते हैं कि जो जिस सदन के लिए चुना गया है,वह उसी सदन में रह कर काम करे।
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सिद्धांत व शीर्ष नेता की इच्छा को ध्यान में रखते हुए भूपेन बाबू का त्याग देखिए और दूसरी ओर आज के अधिकतर तथाकथित समाजवादियों का चाल,चरित्र और चिंतन पर गौर कीजिए।
समाजवादी धारा के यानी लोहिया की धारा के जो सिद्धांतवादी लोग बचे हैं,उन्हें भूपेन बाबू पर लिखी गई,इस किताब को पढ़ना चाहिए।
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मुझसे मत पूछिएगा कि किताब कहां मिलेगी।
लेखक से मेरा कोई परिचय भी नहीं है। मुलाकात भी नहीं। हालांकि उनका नाम सुना है।
शरदेन्दु बाबू पटना विश्व विद्यालय के प्रोफेसर व हिन्दी विभाग के अध्यक्ष रहे हैं। पुस्तक में उनके मोबाइल नंबर अंकित हैं-शायद इससे मदद मिले।
–9431077723
–8271193877
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1 अगस्त 2026

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