“जो विद्यार्थी और शिक्षक बदलती तकनीकों के साथ स्वयं को नहीं जोड़ेंगे, वे भविष्य की प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएंगे : डॉ. जैनेन्द्र कुमार”
बनगाँव (सहरसा), 4 अगस्त। लक्ष्मीनाथ महाविद्यालय, बनगाँव में अखिल भारतीय शिक्षा समागम (ABSS-2026) के अंतर्गत राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के छह वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 : छह वर्षों की उपलब्धियाँ, नवाचार एवं भविष्य की दिशा” विषय पर शैक्षणिक एवं संवादात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. लोकेश चंद्र खां ने की, जबकि सचिव उमा शंकर खां की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्राचार्य प्रो. लोकेश चंद्र खां एवं सचिव उमा शंकर खां ने मुख्य अतिथि भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक परिषद के उपनिदेशक एवं पीजी सेंटर, सहरसा में सहायक प्राध्यापक डॉ. जैनेन्द्र कुमार का पारंपरिक पाग एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानपूर्वक स्वागत किया। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन प्रो. गणेश खां ने किया तथा प्रो. प्रकाश चंद्र खां ने नोडल पदाधिकारी के रूप में कार्यक्रम का समन्वयन किया।
मुख्य अतिथि डॉ. जैनेन्द्र कुमार ने अपने संबोधन में कहा, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 हमें भविष्य की शिक्षा और नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का अवसर देती है। जो विद्यार्थी और शिक्षक बदलती तकनीकों के साथ स्वयं को नहीं जोड़ेंगे, वे आने वाले समय की प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएंगे।” उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति आधुनिक तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा के संरक्षण तथा उस पर नए दृष्टिकोण से शोध को भी प्रोत्साहित करती है। भारत के प्राचीन ज्ञान, विज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का समुचित संरक्षण नहीं होने के कारण उसका आधुनिक संदर्भों में अपेक्षित विकास नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा सुधार का व्यापक रोडमैप तो तैयार किया है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक वित्तीय एवं आधारभूत संसाधन अभी भी पर्याप्त नहीं हैं। जब तक सरकार आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में गंभीरता से कार्य नहीं करेगी, तब तक नीति के उद्देश्यों को पूरी तरह धरातल पर उतारना कठिन होगा।
महाविद्यालय के सचिव उमा शंकर खां ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 केवल रोजगारपरक शिक्षा का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह भारत की ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत, मानवीय मूल्यों और चरित्र निर्माण को भी समान महत्व देती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ नैतिकता, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा भारतीय जीवन-मूल्यों का विकास होना भी उतना ही आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रो. गणेश खां ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा को अधिक समावेशी, नवाचारोन्मुख और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों, शिक्षण संस्थानों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय तथा निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अंत में उन्होंने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुबोध कुमार मिश्र, प्रो. अनिल कुमार, प्रो. विनय कुमार मिश्र ठाकुर, प्रो. प्रकाश चंद्र मिश्रा, प्रो. उदय किशोर खां, प्रो. रुद्रानंद झा, डॉ. प्रो. आभा कुमारी, डॉ. प्रेम कुमारी, प्रो. भवेश खां, प्रो. हरे राम बाबू, प्रो. सुमन कुमार झा, राहुल कुमार खां, रोहित खां, विनीत कुमार ठाकुर, जय शंकर ठाकुर, अखिलेश कुमार, अजय कुमार चौधरी, सुबोध कुमार झा, शुभंकर झा, विष्णु कुमार मिश्र, शिवम कुमार ठाकुर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।














