
उत्पीड़ितों का स्वतंत्र भाषा-मनोविज्ञान जरूरी
उत्पीड़ित वह है, जो अपने वजूद के लिए संघर्ष कर रहा है। वह ना हारा है, ना जीता है। वह ना सफल है और न

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बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के फेसबुक पेज बीएनएमयू संवाद व्याख्यानमाला के तहत 26 जुलाई, 2020 रविवार को अपराहन 2:30 बजे से सूचना का अधिकार और

व्याख्यान 27 जुलाई को युवा प्राध्यापक एवं कवि डॉ. अरुणाभ सौरभ 27 जुलाई, 2020, सोमवार को अपराह्न 4:00 से 5:00 बजे तक बी. एन.

सफलता से इतराएँ नहीं और असफलता से घबड़ाएँ नहीं —– परीक्षा में प्राप्त अंक के आधार पर अपना मूल्यांकन नहीं करें।आप स्वयं अपना आत्म मूल्यांकन

कोरोना से सबक लेने की जरूरत सादगी और संयम को अपनाने की जरूरत सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन भी निभाए अपनी जिम्मेदारी प्रांगण रंगमंच ने आयोजित

मनुष्य चला जाता है, लेकिन उसकी कीर्ति यहां रह जाती है। जो कुछ कीर्ति करके जाते हैं, वे हमेशा जीवित रहते हैं। लालजी टंडन की

भारतीय सभ्यता-संस्कृति में सर्व खलु इदं ब्रह्म, ईशावास्यमिदं सर्वं, और सियाराम मय सब जग जानी कल्पना की गई है। हम यह मानते हैं कि संपूर्ण

रसायनशास्त्र विभाग, मनोहरलाल टेकरीवाल कॉलेज, सहरसा में अतिथि सहायक प्राध्यापक डॉ• आनन्द मोहन झा का चयन प्रतिष्ठित ”एम•टी•सी• ग्लोबल इंस्पायरिंग टीचर अवार्ड, रसायनशास्त्र के लिए

बीएन मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा, बिहार के फेसबुक पेज Facebook.com/bnmusamvad पर 26 जुलाई, 2020 रविवार को पूर्वाह्न ग्यारह बजे उत्पीड़ितों का भाषा-मनोविज्ञान (Psycho- Semiotics of the

मानव एक स्वप्नदर्शी प्राणी है | इतिहास को खोजना और अपने भविष्य की और झांकाना इसे प्रिय है। यह बात डा. गोविन्दशरण उपाध्याय ने कही।
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