
Bihar। नित्यानंद हीरानंद वात्स्यायन : समर्पित साहित्यकार एवं चिकित्सक, अज्ञेय के अनुज
खगड़िया जिलान्तर्गत नयागांव निवासी डा. नित्यानंद हीरानंद वात्स्यायन (पंजाबी डाक्टर) का जन्म 3 जनवरी, 1910 ई. को लाहौर के विश्वमथ रोड स्थित पैतृक निवास में

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बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में दीक्षांत स्थल पर कुलपति प्रोफेसर डाॅ. ज्ञानंजय द्विवेदी ने झंडोत्तोलन के अतिरिक्त अन्य जगहों पर भी झंडोत्तोलन किया गया।

लंबे संघर्ष, त्याग, तपस्या और बलिदान के बाद 15 अगस्त, 1947 को हमारा देश आजाद हुआ। हमने अंग्रेजी हुकूमत की दासता से मुक्ति पाई। आज

आजादी को हमारे पुरखों ने स्वराज कहा है। स्वराज अपने मन का राज है। यह राज सब के द्वारा बनेगा सबके लिए बनेगा और सब

भारतीय सभ्यता-संस्कृति एवं दर्शन में समग्र जीवन एवं संपूर्ण विश्व की चिंता है। हमारे ॠषि-मुनियों ने न केवल मनुष्य, बल्कि समस्त जीव-जंतु, पशु-पक्षी, प्रकृति-पर्यावरण आदि
राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 काफी सराहनीय है। यह नीति भारतीय परंपरा की महान विरासत से युक्त है। यह एक लंबे अंतराल के बाद देश की

भारतीय कला और संस्कृति के क्षेत्र में अंग प्रदेश की मंजूषा कला प्रसिद्ध है। यह अपने विभिन्न स्वरूपों में सदा जगमगाती रही है। इस जगमगाहट
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