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Poem। कविता। समय के समक्ष

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समय के समक्ष जब-
भिक्षुक हो जाएँ सभी विकल्प;
जीवित रखना होता तब;
अन्तःप्रज्ञा का ही दृढ़ संकल्प।
लक्ष्य निष्ठुर हो जाते हैं जब-
रातों में पहाड़ी पगडंडी -से;
अपना लहू प्रपंच-मन में भर;
जिजीविषा की दियासलाई से-
चिमनी को जलाना होता तब।
निचोड़ आँखों को स्वयं की;
कामनाओं की बाती सुलगाना-
जीवन-अनिवार्य प्रश्न-सा;
उत्तर लिखकर भी; विकल्पहीन-
असफल ही कहलाता;
जबकि वह दिन-रात- वेश्या सा
अपना तन-मन सुलगाता…

डॉ कविता भट्ट ‘शैलपुत्री’

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दिनांक 15 अगस्त को शिक्षा विभाग से संबंधित उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषित पहल के संदर्भ में समिति के व्यापक कार्यादेश एवं कार्यक्षेत्र में राज्य की संपूर्ण स्कूली एवं उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े नीतिगत, संरचनात्मक एवं सेवा-संबंधी विषयों को समाहित किए जाने के संबंध में।

वित्त रहित शिक्षा नीति की समाप्ति के उपरांत परीक्षाफल आधारित वेतनानुदान से आच्छादित माध्यमिक, इंटरमीडिएट एवं डिग्री महाविद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के बकाया वेतनानुदान के एकमुश्त भुगतान तथा सम्मानजनक नियमित वेतन-संरचना निर्धारित किए जाने के संबंध में अनुरोध ।

बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षक-निर्माण, शिक्षण-प्रशिक्षण की गुणवत्ता एवं एकरूपता तथा शैक्षणिक शोध एवं नवाचार को सुदृढ़ करने हेतु पृथक् “राज्य शिक्षण-प्रशिक्षण विश्वविद्यालय” की स्थापना के संबंध में अनुरोध।