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Poem। कविता। शब्द – डॉ. सरोज

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शब्द
– डॉ. सरोज
शब्द कुछ स्वर और व्यंजनों का जोड़ नहीं होता
एक सार्थक शब्द महाकाब्वय का बीज होता है
एक शब्द अंदर तक छलनी कर देता
गोलियों की बौछार से कहीं ज्यादा
एक शब्द मृत्यु शैया पर पड़े असहाय को
देता है जीवन का दान
शब्दों के मर्म को समझो।

शब्दों से खिलवाड़ मत करो
एक शब्द से जीवन में उठता है तूफान
एक शब्द से आता है महाप्रलय
एक शब्द से होता है महाविस्फोट
जिंदगी धुआं- धुआं हो जाती है
नजर आते हैं सिर्फ नरकंकाल
शब्दों से खेलना बंद करो
शब्दों के मर्म को समझो।

एक शब्द में समाहित होती है
सहस्र प्रमाणु विस्फोट से कहीं अधिक ऊर्जा
जमी होती है कई युगों की पीड़ा
एक शब्द में समाहित होता है
शहद से कहीं अधिक मिठास
संगीत का सुर, लय और ताल
शब्दों को सप्तम स्वरों में बजने दो
शब्दों को जीवन संगीत बनने दो
शब्दों से खिलवाड़ बंद करो
शब्दों के मर्म को समझो…

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