याद की गईं सरोजनी नायडू
—-
भारत कोकिला सरोजिनी नायडू ( 13 फरवरी, 1879– 2 मार्च, 1949) के जन्मदिवस सह राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) कार्यालय में श्रद्धांजलि सभा एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर विषय प्रवेश कराते हुए परिसंपदा पदाधिकारी शंभू नारायण यादव ने बताया कि सरोजनी नायडू हैदराबाद में एक बंगाली परिवार में जन्मीं थीं। उन्होंने मद्रास, लंदन और कैम्ब्रिज में शिक्षा प्राप्त की।

उन्होंने बताया कि सरोजनी नायडू ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई। वे कांग्रेस पार्टी के संघर्ष से प्रभावित हुईं और महात्मा गांधी की अनुयायी और स्वराज (स्वशासन) के विचार की समर्थक बन गईं। उन्हें 1925 में कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
उन्होंने बताया कि नायडू को सन् 1947 में ब्रिटिश शासन से भारत की स्वतंत्रता के बाद संयुक्त प्रांत (वर्तमान उत्तर प्रदेश ) का राज्यपाल नियुक्त किया गया। वे मार्च 1949 में अपनी मृत्यु तक (70 वर्ष की आयु में) पद पर बनी रहीं।

मुख्य अतिथि एम. एड. विभागाध्यक्ष डॉ. एस. पी. सिंह ने बताया कि नायडू को बिहार राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए भारत की संविधान सभा के लिए चुना गया था। हालाँकि संविधान को अंतिम रूप देने और मतदान के लिए रखे जाने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने 11 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा में अपना एकमात्र भाषण दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पीजी सेन्टर, सहरसा के प्रो. सिद्धेश्वर काश्यप ने बताया कि सरोजनी नायडू का व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे एक स्वतंत्रता सेनानी के साथ-साथ एक भारतीय राजनीतिक कार्यकर्ता और कवयित्री थीं। उनके साहित्यिक कार्यों के कारण राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने उन्हें द भारत कोकिला की उपाधि दीं।
उन्होंने बताया कि सरोजनी नायडू की रचनाओं में बच्चों एवं महिलाओं के लिए लिखी गई कविताएँ प्रमुख हैं। उन्होंने देशभक्ति एवं सामाजिक त्रासदी जैसे गंभीर विषयों पर भी कविताएँ लिखीं।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुधांशु शेखर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार ने किया। इस अवसर पर शोधार्थी डॉ. सौरभ कुमार चौहान सहित अन्य उपस्थित थे।












