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BNMU विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभाग में मानव अस्तित्व का दार्शनिक विश्लेषण विषयक व्याख्यान का आयोजन।

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*व्याख्यान का आयोजन*

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भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के शैक्षणिक परिसर अवस्थित विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभाग में मंगलवार को मानव अस्तित्व का दार्शनिक विश्लेषण विषयक व्याख्यान का आयोजन किया गया।

*दर्शन के केंद्र में है मानव*

इसके मुख्य वक्ता दर्शनशास्त्र विभाग, बी. आर. अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के प्रोफेसर डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि संपूर्ण दर्शन मानव अस्तित्व के इर्द-गिर्द घूमता है। मानव ही दर्शन के केंद्र में है। लेकिन दुख की बात यह है कि हम विश्लेषण के क्षेत्र में तो आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन मानवता पीछे छूटती जा रही है।

उन्होंने कहा कि तर्कशास्त्रियों ने मानव को एक बौद्धिक प्राणी कहा है। लेकिन वास्तव में मानव एक संवेदनशील प्राणी है। मानव की मुख्य विशेषता बौद्धिकता नहीं, बल्कि संवेदनशील है। मानव जीवन तर्क से नहीं, बल्कि संवेदना से चलता है। मानव संवेदना के कारण ही मानव है।

*स्वार्थ से परार्थ की ओर ले जाती है सच्ची मानवता*

उन्होंने कहा कि सच्ची मानवता हमें स्वार्थ से परार्थ की ओर ले जाती है। यही कारण है कि मानव न केवल अपने वरन् पशु-पक्षी आदि मानवेतर प्राणियों तथा प्रकृति-पर्यावरण आदि की भी चिंता करता है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में मानव का एक विशिष्ट स्थान है। मानव पशु एवं देवता दोनों के बीच में है। मानव जीवन में संवेदना नहीं हो, तो मानव पशु हो जाता है और यदि संवेदना या करूणा बढ़ती है, तो मानव देवत्व को प्राप्त कर लेता है।

उन्होंने कहा कि आज बाजारवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है। इसके कारण हम अपने परिवार एवं पड़ोस से भी दूर हो गए हैं।

 

व्याख्यान के उद्घाटनकर्ता पूर्व कुलपति प्रो. ज्ञानंजय द्विवेदी ने कहा कि मानव जीवन में आध्यात्मिक एवं भौतिक दोनों पक्षों का महत्व है। दोनों के समन्वय से हम जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हमें जीवन के दोनों पक्षों को ध्यान में रखकर निष्काम कर्म करना चाहिए। यही आत्मापूर्णता का मार्ग है।

मानव का सबसे बड़ा गुण चिंतन-मनन है

इस अवसर पर मुख्य अतिथि मानविकी संकायाध्यक्ष एवं अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. आर. के. मल्लिक ने कहा कि मानव का सबसे बड़ा गुण चिंतन-मनन है। चूंकि सभी मनुष्य चिंतन-मनन कर सकते हैं, इसलिए सभी मनुष्य दार्शनिक होते हैं।

उन्होंने कहा कि मानव का सबसे बड़ा गुण है कि वह अपनी स्थिति से संतुष्ट नहीं रह सकता है। मानव मानव चिंतन-मनन करके अपनी स्थिति में परिवर्तन ला सकता है। मानव स्वयं अपने भाग्य का निर्माता होता है।

विशिष्ट अतिथि निदेशक (आईक्यूएसी) प्रो. नरेश कुमार ने कहा कि विज्ञान एवं दर्शन दोनों मानव अस्तित्व का अध्ययन करता है। लेकिन दोनों की विधि अलग-अलग है।

सम्मानित अतिथि हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. उषा सिन्हा ने कहा कि मानव जीवन कर्म प्रधान है। हम अच्छा कर्म करके ही अपने लौकिक एवं पारलौकिक दोनों जीवन को सफल बना सकते हैं।

इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. सी. पी. सिंह ने कहा कि मानव ही पृथ्वी की सबसे बड़ी खूबसूरती है। मानव है, तो सब कुछ है। मानव विहिन पृथ्वी का कोई मूल्य नहीं है। ईश्वर भी दुनिया में धर्म की स्थापना हेतु मानव रूप धारण करते हैं।

पीजी सेंटर, सहरसा के डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप ने कहा कि साहित्य में मानव अस्तित्व की काफी चर्चा की गई है।

अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि दर्शनशास्त्र विभाग में लगातार कार्यक्रमों कि आयोजन किया जा रहा है और नियमित रूप से कक्षाएं भी संचालित हो रही हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से अनुरोध किया है कि वे विभिन्न कार्यक्रमों एवं कक्षाओं में नियमित रूप से अपनी उपस्थित सुनिश्चित कराएं।

कार्यक्रम का संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर विनय कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन शोधार्थी शक्ति सागर ने किया।

इस अवसर पर अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. मो. साहिद, उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. मो. एहसान, डॉ. योगेश कुमार, डॉ. अजय कुमार, डॉ. संजय परमार, खुशबू कुमारी, कुंदन कुमार, अबरार आलम, शक्ति सागर, अजय कुमार, डॉ. माधव कुमार आदि उपस्थित थे।

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