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BNMU ‘मनोरोग और युवा : बचाव एवं उपचार’ विषय पर सेमिनार आयोजित

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‘मनोरोग और युवा : बचाव एवं उपचार’ विषय पर सेमिनार आयोजित

मधेपुरा: विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग में तीसरे सेमेस्टर के छात्र एवं छात्राओं द्वारा “मनोरोग और युवा: बचाव एवं उपचार” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया. सेमिनार की अध्यक्षता प्रो. एम आई रहमान ने किया. सेमिनार में मुख्य अतिथि प्रो. नरेंद्र श्रीवास्तव, स्नातकोत्तर जन्तु विज्ञान विभाग उपस्थित हुए. विशेष अतिथि के रूप में सुश्री प्रियंका, असिस्टेंट प्रोफेसर स्नातकोत्तर गृहविज्ञान विभाग शामिल हुईं.

विषय प्रवेश विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ आनंद कुमार सिंह ने करते हुए अपने व्याख्यान में मानसिक रोग के कारणों की चर्चा की. उन्होंने बताया कि आज की युवा पीढ़ी इसकी चपेट में सब से अधिक आ रहे हैं. युवाओं की आकांक्षाएं अत्यधिक बढ़ गई हैं और जब लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो पाती है तो उनमें अवसाद जन्म लेने लगता है जो आगे चलकर विभिन्न प्रकार के मानसिक तनाव का कारण बनता है जो युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है.

प्रियंका ने अपने व्याख्यान में मानसिक स्वास्थ्य की विशेष चर्चा की. उन्होंने बताया कि मनोविज्ञान की भूमिका आज के युग में बहुत अधिक है. जिस प्रकार शारीरिक स्वास्थ्य आवश्यक है. उसी तरह मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा भी बहुत ज़रूरी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित हैं.

उन्होंने युवाओं का अहुवान करते हुए कहा कि आज उन्हें अपने मानसिक स्वास्थ्य के लिए सजग रहने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि समय पर योग और सुबह सुबह टहलने से मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है. अपने भाषण में मुख्य अतिथि प्रो नरेंद्र श्रीवास्तव ने मनोरोग की व्याख्या जैविक आधार पर करते हुए बताया कि स्वस्थ स्नायुं के माध्यम से भी मनोरोग से बचा जा सकता है. उन्होंने मनोरोग के जैविक दृष्टिकोण, वंशनुक्रम और पर्यावरण के महत्व को उजागर किया.

उन्होंने नशीले पदार्थों के सेवन को मनोरोग का एक कारण मानते हुए युवा पीढी को इस से बचने की सलाह दी.                                                                   अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. रहमान ने बताया कि आज के युग में दस युवाओं में से नौ मानसिक रोगों से ग्रस्त हैं. इसके कोई एक कारण नहीं, बल्कि अनेकों कारण हैं. मनोवैज्ञानिकों दृष्टिकोण से देखें, तो युवाओं पर जिम्मेवारियों का बोझ, अपने भविष्य को लेकर चिंताएं, बेरोज़गारी, घरेलू समस्याएं आदि युवाओं में मनोरोग को बढ़ावा दे रही हैं. सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, देर रात तक जागना, अल्पनिंद्र आदि युवाओं को अंदर से तोड़ रही हैं और जब ये समस्याएं जटिल हो जाती हैं तो स्वतः मनोरोग और मनोविकार युवाओं में आने लगती हैं. मनोरोग के उत्पन्न होते ही मनोचिकित्सकों एवं मनोवैज्ञानिकों से संपर्क स्थापित करना चाहिए.

यथासंभव योग, मेडिटेशन और एक्सरसाइज को अपनाना चाहिए ताकि ससमय उत्पन्न समस्याओं का समाधान हो सके.

विभाग के गेस्ट फैकल्टी डॉ. सिकंदर कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया. आयोजन का सफल संचालन छात्रा प्रीति ने किया. सेमिनार में उपस्थित सभी छात्र एवं छात्राओं ने भी अपने अपने विचार प्रस्तुत किया.

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