Search
Close this search box.

BNMU। Poem। कविता। खेत मेरा है

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

खेत मेरा है , मेहनत मेरी है ,
पसीना मेरा बहा , मेहनत मैंने किया.
बारिश में भींगते हुए , लू में तपते हुए.
जाड़े में ठिठुरते हुए , बाढ़ में फंसते हुए,
जीवन मैंने जिया, मेहनत मैंने किया .
बीज के लिए , खाद के लिए, जुताई के लिए ,
बुआई के लिए , हमने साझा काम किया.
हर क्षण हमने गीत गाया, कुदाल चलाते हुए, धान रोंपते हुए ,
फसल काटते हुए, फसल ओसाते हुए .
खुश हैं हम , सिरजने के सुख से.
लेकिन हमारी हर खुशी को हमसे छीनी जा रही है.
हमारे आधार को हमसे दरकाया जा रहा है.
अब हम किसके भरोसे रहेंगे ?
ना तो खेत मेरी है ,
ना खाद मेरा है,
ना पानी मेरा रहा,
ना तो समाज मेरा रहा .
आहिस्ता-आहिस्ता, हर हमारी चीज तुम्हारी हुई,
पहले हमारी मेहनत गई, फिर हमारी एकता गई, अब हमारी खेत भी तुम्हारी हुई.

डॉ बंदना भारती
असिस्टेंट प्रोफेसर
पूर्णियाँ विश्वविद्यालय पूर्णियाँ

READ MORE

विश्वविद्यालय के अन्तर्गत संबद्धता प्राप्त अनुदानित डिग्री महाविद्यालयों को शैक्षणिक सत्र 2015-18 का परीक्षाफल आधारित अनुदान राशि प्राप्त करने हेतु भौतिक रूप से प्ररस्ताव उपलब्ध कराने के संबंध में

[the_ad id="32069"]

READ MORE

विश्वविद्यालय के अन्तर्गत संबद्धता प्राप्त अनुदानित डिग्री महाविद्यालयों को शैक्षणिक सत्र 2015-18 का परीक्षाफल आधारित अनुदान राशि प्राप्त करने हेतु भौतिक रूप से प्ररस्ताव उपलब्ध कराने के संबंध में

बीएनएमयू कर्मचारी संघ ने विश्वविद्यालय परिसर में दिया धरना बीएनएमयू में कर्मचारियों के हड़ताल से काम काज प्रभावित 15 सूत्री मांगों के समर्थन में आयोजित धरना में कर्मचारियों ने की जमकर नारेबाजी