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BNMU अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बीएनएमयू की महती भागीदारी*

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*अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बीएनएमयू की महती भागीदारी*

अर्थशास्त्र विभाग महिला महाविद्यालय, खगड़िया में विकासात्मक मुद्दे और अंत: विषयक शोध पर केंद्रीत दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ हुआ।‌ फोरम फॉर इंटर डिसीप्लिनरी रिसर्च मेथड्स के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में बीएनएमयू की महती भागीदारी रही। इसमें भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कई शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने अपने विचार व्यक्त किए।

*अंत: विषयक शोध को बढ़ावा देने की जरूरत*
स्नातकोत्तर पश्चिमी परिसर, सहरसा में हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप ने कहा कि आज अंत: विषयक शोध को बढ़ावा देने की जरूरत है। साहित्य का समाज, दर्शन, संस्कृति एवं मनोविज्ञान से गहरा जुड़ाव है। सभी आपस में एक-दूसरे से परस्पर संबंधित हैं।

*आर्थिक प्रगति विकास का एकमात्र मापदंड नहीं*
ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा में दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि आर्थिक प्रगति विकास का एकमात्र मापदंड नहीं है। हम सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं को यूरो एवं डॉलर से नहीं माप सकते हैं।

उन्होंने कहा कि रेगीस्तान में प्यास से भटकते व्यक्ति के लिए एक ग्लास पानी, किसी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के लिए एक यूनिट रक्त, कोरोनाकाल का एक सिलिंडर आक्सीजन बहुमूल्य है। आंगन में लगे तुलसी के पौधे, पूजा की वेदी पर लगे शालिग्राम पत्थर या पहले प्यार में मिले रुमाल को हम रूपये से नहीं तौल सकते हैं। भरी जवानी में परिवार को छोड़कर दिल्ली-पंजाब जाकर आजीविका कमाने वाले युवाओं के परिश्रम का मूल्य तौलना आसान नहीं है।

*बदलने होंगे विकास के मापदंड*
उन्होंने कहा कि हमें विकास के मापदंड को बदलने होंगे और शोध की दृष्टि एवं दिशा भी बदलनी होगी। भारतीय समाज को हम फ्रायड, मार्क्स एवं मैकाले और डार्विन, हॉब्स एवं मिल की दृष्टि से नहीं समझ सकते हैं। हमें अपने इतिहास एवं संस्कृति को केंद्र में रखकर अपनी दृष्टि विकसित करनी होगी। हमें पतंजलि, कौटिल्य एवं भर्तृहरि और अरविंद, विवेकानंद एवं गांधी की ओर लौटना होगा।
*बिहार में है शोध सुविधाओं की काफी कमी*
मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर कुमार मिश्र ने कहा कि पूरे बिहार में शोध सुविधाओं की काफी कमी है। इसके बावजूद खगड़िया जैसे पिछड़े क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करना गौरव की बात है।

कार्यक्रम में अतिथि व्याख्याता डॉ. राकेश कुमार, शोधार्थी माधव कुमार, सौरभ कुमार चौहान, अक्षय सिद्धांत, मुकेश कुमार, ब्रजभूषण कुमार, कौशल कुमार यादव आदि ने भी भाग लिया।

*बहुआयामी संकल्पना है विकास*
इसके पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मुंगेर विश्वविद्यालय, मुंगेर की कुलपति डॉ. श्यामा राय ने कहा कि विकास एक बहुआयामी संकल्पना है। सामाजिक, सांस्कृतिक धार्मिक, आर्थिक आदि इसके विभिन्न आयाम हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक समृद्धि विकास का मात्र एक पहलु है। जीवन के आर्थिक पक्ष की उन्नति के साथ-साथ उचित जीवन स्तर एवं गरिमापूर्ण जीवन की गारंटी भी आवश्यक है।

*विकास में शोध की है महत्वपूर्ण भूमिका*

आयोजन सचिव डॉ. शोभा रानी ने बताया कि किसी भी देश के विकास में शोध की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अमेरिका, रूस, चीन, जापान, स्वीडन एवं सिंगापुर जैसे देशों के विकास में अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह भी आवश्यकता महसूस किया जा रहा है कि यदि भारत को तीव्र विकास के पथ पर अग्रसारित होना है, तो शोध पर बल देना होगा।

*शोध का काफी महत्व*
संयोजक डॉ. अनिल ठाकुर ने कहा कि वर्तमान समय में शोध का काफी महत्व है। हमें विज्ञान, वाणिज्य, कृषि, उद्योग एवं शिक्षा में शोध को बढ़ावा देने की जरूरत है।

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